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संस्कारधानी में राम नाम की महिमा का बखान: जगदगुरु रामभद्राचार्य ने समझाया राम मंत्र का वैज्ञानिक व आध्यात्मिक महत्व


जबलपुरग्वारीघाट स्थित अवधपुरी में आयोजित नवाह श्रीरामकथा के दूसरे दिन तुलसी पीठाधीश्वर जगदगुरु रामभद्राचार्य महाराज ने राम नाम की शक्ति पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने राम नाम को एक ऐसी पावन धारा बताया जिसमें स्नान मात्र से मनुष्य का कल्याण सुनिश्चित है। समरसता सेवा संगठन द्वारा आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में महाराज ने स्पष्ट किया कि राम मंत्र विश्व का सबसे प्राचीन और वैदिक मंत्र है जिसका उल्लेख वेदों के मंत्र भाग में मिलता है। उन्होंने कहा कि राम शब्द अखंड है जबकि अन्य शब्द सखंड हो सकते हैं। उनके अनुसार रामजी का प्राकट्य संपूर्ण जगत के मंगल के लिए हुआ है और उनका चिंतन ही वर्तमान समय की हर समस्या का एकमात्र समाधान है।

​राम और सीता की अभिन्नता और 108 अंक का रहस्य

​कथा के दौरान महाराज ने सीता और राम के स्वरूप को एक ही परमात्मा के दो रूप बताया। उन्होंने अर्थव वेद की श्रुति का प्रमाण देते हुए कहा कि जो राम हैं वही सीता हैं। भक्त को आनंद प्रदान करने के लिए एक ही तत्व ने दो रूप धारण किए हैं जिसमें मिथिला में सीता माता के रूप में और अयोध्या में राम पिता के रूप में प्रकट हुए। महाराज ने माला के 108 मणकों के पीछे का गणितीय आधार भी समझाया। उन्होंने बताया कि वर्णमाला के अंकों के अनुसार सीता नाम का योग 54 और राम नाम का योग भी 54 होता है। इन दोनों का सम्मिलित योग 108 बैठता है जो पूर्णता का प्रतीक है। यही कारण है कि 108 की माला का जाप सीताराम की पूर्णता को दर्शाता है।

​संस्कृत की रक्षा और सामाजिक समरसता पर जोर

​व्यासपीठ से जगदगुरु ने राष्ट्रधर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि संस्कृत और संस्कृति ही भारत की दो मुख्य प्रतिष्ठाएं हैं। वर्तमान युग में संस्कृत भाषा की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का सबसे बड़ा दायित्व है। उन्होंने सामाजिक एकता का संदेश देते हुए कहा कि भले ही उपासना के पंथ अनेक हों लेकिन सभी हिंदुओं को एक सूत्र में बंधना चाहिए। महाराज ने बताया कि राम का बाण ही रावण जैसी आसुरी शक्तियों का नाश कर त्रिदेवों के मंगल की रक्षा करता है। उन्होंने तुलसीदास जी के दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि निर्गुण और सगुण राम में कोई भेद नहीं है जो परब्रह्म हैं वही दशरथ नंदन बनकर धरा पर आए हैं।

​दिव्यांग सेवा और वीरांगना दुर्गावती को काव्यात्मक नमन

​कथा के दौरान तुलसी पीठ के रामचंद्रदास शास्त्री ने जगदगुरु के जीवन और उनके सेवा कार्यों से श्रोताओं को परिचित कराया। उन्होंने बताया कि महाराज का जीवन दिव्यांगों के उत्थान के लिए समर्पित है और उन्होंने विश्व का प्रथम दिव्यांग विश्वविद्यालय स्थापित कर हजारों बच्चों को स्वावलंबी बनाया है। कार्यक्रम में प्रदेश के लोकनिर्माण मंत्री राकेश सिंह ने पादुका पूजन किया और महाराज का स्वागत करते हुए इसे शहर का सौभाग्य बताया। कथा के पूर्व मंच पर नाट्य लोक संस्था द्वारा वीरांगना रानी दुर्गावती के जीवन पर आधारित एक प्रभावी नाटिका प्रस्तुत की गई। इसमें नर्रई नाला और मदन महल के ऐतिहासिक प्रसंगों को जीवंत किया गया जिससे दर्शक भावविभोर हो गए।

​आयोजन में दूर-दूर से आ रहे भक्त

​इस धार्मिक आयोजन में मुख्य यजमान डॉ प्रकाश धीरावाणी के साथ सुदर्शन जगदीश चोहटेल, डॉ अमीरचंद सोनकर, डॉ जितेन्द्र जामदार और संदीप जैन उपस्थित रहे। पूजन विधान में दीपक महरौलिया, गुलशन माखीजा, लोकराम कोरी, वीरेन्द्र केसरवानी, दास प्रसाद अहिरवार और प्रदीप चौहान ने सहभागिता की। कथा श्रवण के लिए न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल, जज रामनरेश पटेल, डॉ कैलाश गुप्ता, गिरिराज चाचा, मेवालाल छिरोलिया और जगजीत सिंह पप्पू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन ब्रजेश दीक्षित ने किया और रोहित तिवारी सहित अन्य आचार्यों ने स्वस्ति वाचन कर वातावरण को मंगलमय बनाया।

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