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फॉलोअप:जबलपुर स्वास्थ्य विभाग में करोड़ों का गबन, सीएमएचओ संजय मिश्रा समेत कई पर एफआईआर की तैयारी



जबलपुर। जबलपुर जिला स्वास्थ्य विभाग में 4 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के गबन का बड़ा मामला प्रकाश में आया है। वित्तीय अनियमितता के इस प्रकरण में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय मिश्रा के निलंबन और उन्हें भोपाल संबद्ध किए जाने के बाद अब कानूनी कार्रवाई का घेरा मजबूत किया जा रहा है। जांच दल द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर अब दोषियों के विरुद्ध पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है। विभागीय जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि 12 फर्जी देयकों के माध्यम से सरकारी खजाने को भारी क्षति पहुंचाई गई है। इस पूरी साजिश में कई प्रशासनिक अधिकारियों के साथ निचले स्तर के कर्मचारियों की संलिप्तता के प्रमाण मिले हैं।

​फर्जी बिलों से भुगतान और गायब हुए सरकारी रिकॉर्ड

​प्रशासनिक जांच में यह तथ्य सामने आया है कि स्वास्थ्य केंद्रों के लिए साइनेज और अन्य सामग्रियों की आपूर्ति केवल कागजों तक सीमित रही। भौतिक रूप से विभाग को कोई सामान प्राप्त नहीं हुआ, लेकिन फर्जी पावती लगाकर भुगतान कर दिया गया। भोपाल की एक निजी फर्म को नियमों के विरुद्ध 93 लाख 04 हजार 998 रुपए का भुगतान किया गया। इस प्रकरण में जिला कार्यक्रम प्रबंधक कार्यालय द्वारा 1.33 करोड़ और नियमित सीएमएचओ कार्यालय द्वारा लगभग 3 करोड़ रुपए के क्रय आदेश जारी किए गए थे। चौंकाने वाली बात यह है कि जांच के दौरान जिला अस्पताल विक्टोरिया के डीपीएमयू कार्यालय से घोटाले से संबंधित महत्वपूर्ण रिकॉर्ड और दस्तावेज गायब पाए गए हैं, जिसे साक्ष्य मिटाने की गंभीर कोशिश माना जा रहा है।

​जांच के दायरे में अधिकारी और कर्मचारी

​इस संगठित भ्रष्टाचार में डॉ. संजय मिश्रा के अलावा जिला कार्यक्रम प्रबंधक आदित्य तिवारी और फार्मासिस्ट जवाहर लोधी की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई का प्रस्ताव नेशनल हेल्थ मिशन के संचालक को भेजा गया है। इससे पूर्व कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने स्टोर कीपर का प्रभार देख रहे फार्मासिस्ट नीरज कौरव को निलंबित कर दिया था। डिप्टी कलेक्टर आरएस मरावी के नेतृत्व वाली जांच टीम अब उन लिपिकों और लेखा शाखा के कर्मचारियों की पहचान कर रही है जिन्होंने फर्जी भौतिक सत्यापन रिपोर्ट तैयार करने में सहयोग किया। आने वाले समय में दस्तावेजों की चोरी और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत संबंधित फर्म के संचालकों और विभागीय दोषियों की गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है।

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