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रेलवे स्टेशन पर टूटा भरोसा, शादी की आड़ में नाबालिग बच्ची की जिंदगी का भयानक सौदा

 


जबलपुर। जबलपुर में मानव तस्करी के एक बड़े और सनसनीखेज मामले का खुलासा हुआ है। यह पूरा मामला नाबालिग लड़कियों को शादी के नाम पर खरीदने और बेचने से जुड़ा हुआ है। इस संगठित गिरोह का संचालन एक पूर्व सरपंच द्वारा किया जा रहा था, जो दलालों की मदद से मासूमों की जिंदगी का सौदा कर रहा था। पुलिस की सघन जांच के बाद इस अंतरराज्यीय रैकेट का पर्दाफाश हुआ है और कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।

​रेलवे स्टेशन से शुरू हुआ पूरा खेल

​मामला 6 दिसंबर 2025 का है, जब घमापुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 16 वर्षीय लड़की अपने पड़ोसी से मिलने के लिए घर से बाहर निकली थी। रास्ते में किसी बात पर विवाद होने के बाद वह युवक लड़की का मोबाइल लेकर मौके से भाग गया। इसके बाद डरी और सहमी हुई लड़की जबलपुर रेलवे स्टेशन पर अकेली बैठी थी। उसी दौरान उसकी मुलाकात मनीष सपेरा से हुई। आरोपी मनीष ने लड़की की लाचारी का फायदा उठाते हुए उसे बहला-फुसलाकर अपने जाल में फंसा लिया और उसे अपने साथ ले गया।

​मंडला से सीहोर तक तस्करी का सौदा

​आरोपी मनीष और उसका भांजा अर्जुन लड़की को लेकर सबसे पहले मंडला पहुंचे, जहां उसे 2 दिन तक बंधक बनाकर रखा गया। इसके बाद आरोपियों ने लड़की को सीहोर जिले के चांदबड़ गांव के पूर्व सरपंच राकेश कोरबे को 1 लाख रुपए में बेच दिया। पूर्व सरपंच राकेश कोरबे ने इस लड़की को 2 लाख रुपए में गुना जिले के एक युवक को बेच दिया। वहां लड़की के परिवार की मौजूदगी में उसकी जबरन शादी करवा दी गई। जांच में सामने आया कि गिरोह का मुख्य सरगना पूर्व सरपंच ही था। उसने दलालों हेमराज कुमारिया, हेमराज विश्वकर्मा, जतन बाई और राय सिंह गुर्जर को 10-10 हजार रुपए बांटे और बाकी की बड़ी रकम खुद अपने पास रख ली।

​एक फोन कॉल ने खोली नेटवर्क की पोल

​लड़की के लापता होने के बाद से पुलिस की साइबर टीम लगातार उसके मोबाइल नंबर को ट्रेस कर रही थी। 19 दिसंबर को पीड़िता ने किसी तरह एक पड़ोसी के मोबाइल से अपने नंबर पर कॉल किया। उस समय वह सिम उसके प्रेमी के पास थी, जिसके कारण पुलिस को तुरंत लोकेशन मिल गई। लोकेशन मिलते ही पुलिस टीम शाजापुर और गुना के लिए रवाना हुई और 22 दिसंबर को लड़की को सकुशल बरामद कर लिया।

​बेचने वाला व खरीदार सहित पंडित भी शिकंजे में

​पुलिस ने इस मामले में अप्रैल 2026 तक कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह में पूर्व सरपंच, दलाल, पंडित और लड़की को खरीदने वाले शामिल हैं। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 142, 143 और 144 के तहत मानव तस्करी का मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस को यह भी आशंका है कि यह एक बड़ा अंतरराज्यीय मानव तस्करी नेटवर्क है, जिसके तार कई अन्य राज्यों और जिलों से जुड़े हो सकते हैं।

​पुलिस की संयुक्त टीम ने की बड़ी कार्रवाई

​इस पूरे खुलासे में पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय के निर्देश पर महिला थाना और साइबर टीम ने संयुक्त रूप से बड़ी कार्रवाई की। दोनों टीमों ने तकनीकी साक्ष्य और मानवीय खुफिया जानकारी का उपयोग करते हुए इस संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया। पुलिस अधिकारी अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि इस रैकेट ने अब तक कितनी और लड़कियों को अपना शिकार बनाया है। आरोपियों से पूछताछ जारी है और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे होने की संभावना बनी हुई है।

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