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स्त्री अधिकारों के संवैधानिक आधार पर जबलपुर में विशेष व्याख्यान



महाकोशल महाविद्यालय में नारी शक्ति वंदन पखवाड़े का गरिमामय समापन

जबलपुर।  शासकीय महाकोशल स्वशासी अग्रणी महाविद्यालय में नारी शक्ति वंदन पखवाड़े का समापन हुआ। इस विशेष अवसर पर महिलाएं एवं कानून विषय पर केंद्रित एक व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विधि विशेषज्ञों और वरिष्ठ प्राध्यापकों ने स्त्री अधिकारों और विधिक सुरक्षा पर विस्तार से बात की गई। मुख्य वक्ता डॉ. आदित्य गर्ग ने व्याख्यान के दौरान महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों और वर्तमान सामाजिक चुनौतियों का विश्लेषण किया। उन्होंने बताया कि आधुनिक कानून व्यवस्था ने स्त्रियों को पुरुषों के समान अधिकार देकर सशक्तिकरण का मार्ग तैयार किया है। उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 के तहत प्राप्त मौलिक अधिकारों की जानकारी दी। उनके अनुसार महिलाओं की सुरक्षा केवल कानूनी दायित्व तक सीमित न रहकर पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। समाज के सर्वांगीण विकास के लिए महिलाओं का कानूनी रूप से सुदृढ़ होना आवश्यक है।

​अधिकारों के प्रति सजगता आवश्यक

​कार्यक्रम के संयोजक प्रो. अरुण शुक्ल ने विधिक साक्षरता की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश में महिलाओं की रक्षा हेतु पर्याप्त कानून उपलब्ध हैं, परंतु उनकी सफलता तभी संभव है जब समाज में व्यापक जागरूकता आए। उन्होंने छात्राओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने का सुझाव दिया ताकि कानूनों का लाभ जमीनी स्तर पर मिल सके। इस दौरान यह बात रेखांकित की गई कि नियम और अधिकारों की जानकारी ही शोषण के विरुद्ध सबसे बड़ा हथियार है।

​महिला शक्ति को किया सम्मानित

​समापन समारोह के दौरान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अलकेश चतुर्वेदी और प्रो. अरुण शुक्ल ने उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं का सम्मान किया। इस कड़ी में डॉ. ज्योति जुनगरे, श्रीमती बबिता ठाकुर और कु. राधा सैनी को शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शैक्षणिक स्टाफ के साथ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। वक्ताओं ने उपस्थित युवाओं से आह्वान किया कि वे समाज में जाकर महिलाओं के प्रति सम्मानजनक दृष्टिकोण विकसित करने में अपनी भूमिका निभाएं।


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