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अपडेट:जबलपुर संभाग की कमान पंकज श्रीवास्तव के पास, मुख्यमंत्री की सीधी निगरानी में होगी संभागों की सुरक्षा व्यवस्था

 


जबलपुर। मध्य प्रदेश शासन के गृह विभाग ने राज्य की कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के निर्णय के उपरांत सात वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को विभिन्न संभागों में अनुश्रवण और पर्यवेक्षण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। शासन द्वारा जारी नवीन व्यवस्था के तहत अब जोनल आईजी के कार्यों की निगरानी सीधे मुख्यमंत्री के नियंत्रण में रहने वाले ये वरिष्ठ अधिकारी करेंगे।

​जबलपुर सहित अन्य संभागों में वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती

​जबलपुर संभाग की सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी का जिम्मा 1993 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पंकज कुमार श्रीवास्तव को दिया गया है। पंकज कुमार श्रीवास्तव वर्तमान में विशेष पुलिस महानिदेशक सीआईडी और विशेष पुलिस महानिदेशक सतर्कता के पद पर कार्यरत हैं। इसी क्रम में भोपाल संभाग के लिए 1991 बैच के आईपीएस और महानिदेशक जेल वरुण कपूर को अधिकृत किया गया है। उज्जैन संभाग की जिम्मेदारी 1991 बैच के आईपीएस उपेंद्र कुमार जैन को मिली है, जो वर्तमान में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के महानिदेशक हैं। चंबल संभाग का प्रभार 1992 बैच के आईपीएस जी अखेतो सेमा को सौंपा गया है। सागर संभाग के लिए 1994 बैच के आईपीएस अनंत कुमार सिंह तथा नर्मदापुरम के लिए 1993 बैच के आईपीएस रवि कुमार गुप्ता को प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया है। इसके अतिरिक्त शहडोल संभाग की निगरानी 1994 बैच के आईपीएस राजाबाबू सिंह करेंगे।

​पूर्व में नियुक्त अधिकारियों के प्रभार यथावत

​गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि इससे पूर्व के आदेशों के माध्यम से नियुक्त किए गए प्रभारियों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ग्वालियर संभाग की जिम्मेदारी 1991 बैच की आईपीएस प्रज्ञा ऋषा श्रीवास्तव के पास बनी रहेगी। इसी प्रकार रीवा संभाग का कार्यभार 1993 बैच के आईपीएस अनिल कुमार संभालेंगे और इंदौर संभाग की कमान 1992 बैच के आईपीएस आदर्श कटियार के पास रहेगी। 1991 से 1994 बैच के इन अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य पुलिसिंग में सुधार लाना और अपराध नियंत्रण की दिशा में प्रभावी सुपरविजन सुनिश्चित करना है। अब सभी संभागों में जोनल अधिकारियों के ऊपर इन पर्यवेक्षकों की उपस्थिति से जवाबदेही और कार्यकुशलता में वृद्धि होने की संभावना है।

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