बुंदेली लोकधारा का प्रवाह और संगीत की चमक
समारोह के द्वितीय सोपान में सम्मानित कलाकार सौम्या मिश्रा ने पारंपरिक लोक वाद्यों की अनुगूंज के साथ बुंदेली लोकधारा की सरस सरिता प्रवाहित की। उनकी सुमधुर गायकी ने समूचे परिसर को लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया। इस सांगीतिक प्रस्तुति में वैशाली दीवान, शैली, हेमराज चढ़ार, ऋषभ भट्ट, मस्तराम बंसल और लखनलाल रजक ने वाद्ययंत्रों पर ऐसी जादुई संगत की, जिसने उपस्थित श्रोताओं को आत्मविस्मृत कर दिया। लोक धुनों और लयबद्ध वादन के इस समन्वय ने बुंदेलखंड की माटी की सुगंध को जीवंत कर दिया।
भक्ति रस की अविरल वर्षा संग कलात्मक जुगलबंदी
कार्यक्रम के समापन चरण में सुरों की साधना का अनूठा दृश्य देखने को मिला। लोकसुर मणि डॉ. बैजनाथ गौतम और लोक रस माधुरी शिप्रा सुल्लेरे ने अपनी कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। परशुराम पटेल और अंजू दुबे जैसे सिद्धहस्त वादकों की कुशल संगत ने भक्ति रस की ऐसी वर्षा की कि श्रोता भक्ति भाव में डूब गए। कार्यक्रम का सफल और काव्यमयी संचालन माधुरी उमेश मिश्रा एवं वैशाली दीवान ने किया। उनकी शब्द चयन और संचालन शैली ने दर्शकों को कार्यक्रम के अंतिम क्षण तक वैचारिक और भावनात्मक रूप से जोड़े रखा।
लोकविद्या के संरक्षण का सशक्त माध्यम
मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित मनीष तिवारी ने समस्त आगंतुकों और कलाकारों के प्रति आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम की सफलता में सोमदत्त दुबे, शरद अग्रवाल, नीरज शुक्ला, ओम दुबे, डॉ. शिवहरे, मधुमेष मिश्रा और अन्नपूर्णा दुबे की सक्रिय सहभागिता एवं विशेष उपस्थिति रही। यह आयोजन न केवल एक सम्मान समारोह रहा, बल्कि लोक विद्याओं के संरक्षण और संवर्धन का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा। उपस्थित प्रबुद्ध वर्ग ने इस प्रयास को भारतीय लोक परंपराओं के पुनर्जागरण की दिशा में एक मील का पत्थर बताया।

