पटवारी संघ के जिला अध्यक्ष जागेंद्र पिपरी ने बताया कि डायवर्शन से जुड़े मामलों में अन्य अधिकारियों की जिम्मेदारी होने के बावजूद पटवारियों को अनावश्यक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। बिना स्पष्ट कारणों के लक्ष्य निर्धारित किए जा रहे हैं और लक्ष्य पूरा न होने पर एकपक्षीय कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि सात दिन में मांग पूरी नहीं हुई तो हड़ताल होगी। संघ ने यह भी आरोप लगाया कि कई मामलों में विभागीय जांच के बिना ही पटवारियों की वेतन वृद्धि रोक दी गई है, जो सेवा नियमों का उल्लंघन है। इसके अतिरिक्त, स्वीकृत अवकाश के बाद भी पटवारियों का वेतन रोका जाना पूरी तरह अनुचित है। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि पटवारियों से उनके मूल कार्यों के अलावा स्कैनिंग और अन्य गैर-प्रासंगिक कार्य कराए जा रहे हैं, जिससे उन पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है। नए सॉफ्टवेयर और प्रक्रियाओं के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण दिए बिना ही काम का दबाव बनाया जा रहा है।
सात दिन में मांगें पूरी न होने पर हड़ताल की चेतावनी-
पटवारी संघ ने प्रशासन से चार प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें पटवारियों के खिलाफ चल रही अनुचित कार्रवाई तुरंत बंद करना, वेतनवृद्धि रोकने के आदेश निरस्त करना, कार्यक्षेत्र से बाहर के कामों का दबाव खत्म करना और मानसिक व प्रशासनिक उत्पीडऩ रोकना शामिल है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि 7 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो जिले के सभी पटवारी हड़ताल पर जाने को बाध्य होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।