khabar abhi tak

गजब है...! सरकारी डॉक्टर ने खोल लिया खुद का एम्स,स्पेलिंग से फर्जीवाड़ा, जांच शुरू



जबलपुर में प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान के नाम पर निजी अस्पताल का संचालन,शिकायत के बाद जांच शुरू

जबलपुर।  धनवंतरी नगर क्षेत्र में एक निजी चिकित्सा संस्थान के नाम को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सरकारी सेवा में तैनात चिकित्सक डॉ. राकेश तिर्की पर आरोप है कि उन्होंने देश की सर्वोच्च चिकित्सा संस्था एम्स के नाम का उपयोग कर मरीजों को भ्रमित करने वाला अस्पताल संचालित किया है। इस मामले के सामने आने के बाद शहर के चिकित्सा जगत और प्रशासन में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।

​सरकारी चिकित्सक पर लगे गंभीर आरोप

​नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में कार्यरत एक सरकारी चिकित्सक द्वारा निजी स्तर पर अस्पताल का प्रबंधन किया जा रहा है। अस्पताल के नाम में एम्स जैसे प्रतिष्ठित शब्द का प्रयोग किया गया है जिससे आम जनता को यह आभास होता है कि यह केंद्र सरकार की संस्था से संबद्ध है। चिकित्सा क्षेत्र में इस तरह के नाम का चयन कर मरीजों के परिजनों के बीच साख बनाने की कोशिश की गई है। सरकारी नियमों के अनुसार शासकीय पद पर रहते हुए इस तरह के विवादित कार्यों में संलिप्तता अनुशासनहीनता की श्रेणी में आती है।

​समाज सेवी की शिकायत से खुला भेद

​भोपाल निवासी समाजसेवी रवि परमार ने इस पूरे प्रकरण की विधिवत शिकायत स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों से की है। शिकायत में स्पष्ट उल्लेख है कि एम्स जैसे नाम का सहारा लेकर मरीजों से इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूली जा रही है। प्रतीक और नाम अधिनियम 1950 के अंतर्गत किसी भी सरकारी विभाग या संस्थान के नाम से मिलते-जुलते शीर्षक का उपयोग करना पूर्णतः प्रतिबंधित है। इसका मुख्य उद्देश्य व्यावसायिक लाभ के लिए सरकारी पहचान का दुरुपयोग रोकना और जनमानस को धोखाधड़ी से सुरक्षित रखना है।

​सरकारी नियम क्या कहते हैं

​अस्पताल प्रबंधन ने अंग्रेजी के अक्षरों में सूक्ष्म अंतर होने का तर्क देकर अपना बचाव करने का प्रयास किया है। हालांकि कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी निजी संस्था को ऐसे नाम की अनुमति नहीं दी जा सकती जिससे सरकारी संरक्षण का बोध होता हो। केंद्रीय या राष्ट्रीय जैसे शब्दों की भांति ही विशिष्ट संस्थानों के नाम का प्रयोग वर्जित है। कानूनी विशेषज्ञों का मत है कि नाम की ध्वनि और स्वरूप में समानता ही भ्रम फैलाने के लिए पर्याप्त आधार मानी जाती है।

​हॉस्पिटल के रजिस्ट्रेशन की जांच शुरु

​स्वास्थ्य विभाग ने प्राप्त शिकायत को संज्ञान में लेते हुए जांच की तैयारी शुरू कर दी है। विभाग इस बात की पड़ताल कर रहा है कि अस्पताल के पंजीकरण के समय किन दस्तावेजों का उपयोग किया गया और क्या इस नाम के लिए आवश्यक अनुमति प्राप्त थी। यदि जांच में डॉक्टर की संलिप्तता और नाम के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने के साथ ही संबंधित चिकित्सक पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। वर्तमान में शहर के नागरिक और सामाजिक संगठन प्रशासन द्वारा उठाए जाने वाले कड़े कदमों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

Post a Comment

Previous Post Next Post
khabar abhi tak
khabar abhi tak
khabar abhi tak