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जबलपुर: नशा तस्करों की संपत्ति होगी कुर्क और किंगपिन पर कसेगा शिकंजा



जबलपुर पुलिस की नशे के विरुद्ध बड़ी तैयारी तीन वर्ष में नार्कोटिक्स मुक्त बनेगा जिला

जबलपुर। पुलिस महानिदेशक मध्य प्रदेश द्वारा आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से प्राप्त निर्देशों के बाद अब जबलपुर में नार्कोटिक्स ड्रग्स की समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। इस दिशा में पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय ने आज पुलिस कंट्रोल रूम में जिले के तमाम आला अधिकारियों के साथ विशेष बैठक की। बैठक का मुख्य लक्ष्य अगले 3 वर्ष के भीतर जिले को पूरी तरह नशा मुक्त बनाना है। इस दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अपराध जितेन्द्र सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जोन-2 पल्लवी शुक्ला, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात अंजना तिवारी सहित शहर और देहात के समस्त राजपत्रित अधिकारी एवं थाना प्रभारी मौजूद रहे। पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि एनडीपीएस एक्ट 1985 एक बेहद कड़ा कानून है और इसकी कार्यवाही के दौरान वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य है।

​बिचौलियों पर भी होगा एक्शन


नार्कोटिक्स नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए पुलिस अधीक्षक ने ड्रग हॉट स्पॉट और वितरण चैनलों को चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं। अब जिला और थाना स्तर पर मादक पदार्थों का अवैध व्यापार करने वाले आदतन अपराधियों और तस्करों का पृथक रजिस्टर तैयार किया जाएगा। पुलिस न केवल बिचौलियों पर सख्त कार्यवाही करेगी, बल्कि अवैध ड्रग कारोबार से अर्जित की गई संपत्ति को चिन्हित कर उसे संबद्ध करने की प्रक्रिया भी अपनाएगी। पिट एनडीपीएस एक्ट 1988 के प्रावधानों के तहत अपराधियों के विरुद्ध कड़े कदम उठाए जाएंगे। जप्त मादक पदार्थों के स्त्रोत और गंतव्य की कड़ियों को जोड़कर मुख्य सरगना यानी किंगपिन तक पहुंचने के लिए साक्ष्य संकलन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

​जन जागरूकता और पुनर्वास के लिए चलेगा नशे से दूरी है जरूरी अभियान

​पुलिस की रणनीति केवल अपराधियों की धरपकड़ तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को भीतर से मजबूत करने के लिए नशे से दूरी है जरूरी अभियान चलाया जाएगा। इसके अंतर्गत युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाएगा। जो व्यक्ति नशे की गिरफ्त में आ चुके हैं, उनकी काउंसलिंग की जाएगी और जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर उन्हें ड्रग डी-एडिक्शन सेंटर में भर्ती कराया जाएगा। पुलिस अधीक्षक ने अपराधियों पर सख्त प्रहार और समाज में व्यापक चेतना लाने की दो-सूत्रीय रणनीति पर जोर दिया है, ताकि नशे के जाल को पूरी तरह तोड़ा जा सके। पुनर्वास केंद्रों के माध्यम से पीड़ितों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने के प्रयास भी इस अभियान का हिस्सा होंगे।

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