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नारी शक्ति वंदन:सशक्त समाज के लिए महिलाओं की राजनीतिक और आर्थिक भागीदारी अनिवार्य

 



जबलपुर। अग्रणी शासकीय महाकोशल स्वशासी महाविद्यालय में नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा के तहत एक महत्वपूर्ण व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने महिला सशक्तिकरण के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। आयोजन का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को आत्मनिर्भरता और कौशल विकास के प्रति जागरूक करना था।

​साहित्य और समाज में स्त्री की भूमिका

​मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित 81 वर्षीय प्रख्यात लेखिका एवं आलोचक डॉ. निशा तिवारी ने महिला अस्मिता और उनके साहित्यिक योगदान पर सारगर्भित विचार रखे। उन्होंने कहा कि नारी केवल शक्ति का प्रतीक नहीं है बल्कि वह सृजन और संस्कारों की जननी है। समाज की आधारशिला के रूप में महिलाओं के संघर्ष और उनकी उपलब्धियां प्रेरणादायी हैं। डॉ. तिवारी ने छात्राओं को अपनी आंतरिक प्रतिभा पहचानने और स्वावलंबी बनने का संदेश दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि जब महिलाएं शिक्षित और जागरूक होती हैं, तभी एक सुसंस्कृत समाज का निर्माण संभव होता है।

​सरकारी योजनाएं और कौशल विकास के अवसर

​जिला नोडल अधिकारी डॉ. राजलक्ष्मी त्रिपाठी ने स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्शन योजना के अंतर्गत संचालित विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रमों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि आधुनिक समय में शैक्षणिक योग्यता के साथ-साथ हुनरमंद होना अनिवार्य है। इसी क्रम में राजनीति शास्त्र की प्राध्यापक डॉ. चित्रा प्रभात ने शासन द्वारा संचालित महिला केंद्रित योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने विशेष रूप से नारी शक्ति वंदन अधिनियम की चर्चा करते हुए इसे राजनीतिक क्षेत्र में महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित करने वाला एक ऐतिहासिक निर्णय बताया। उनके अनुसार ये नीतियां महिलाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए मील का पत्थर साबित हो रही हैं।

​सामाजिक विकास और प्रतिभा सम्मान

​कार्यक्रम संयोजक प्रो. अरुण शुक्ल ने नारी सशक्तिकरण के सामाजिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक महत्व को प्रतिपादित किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के समग्र विकास के लिए महिलाओं का सम्मान और उनकी प्रगति प्राथमिक शर्त है। आयोजन के अंत में प्रो. शुक्ल द्वारा मुख्य वक्ता डॉ. निशा तिवारी, डॉ. राजलक्ष्मी त्रिपाठी और डॉ. चित्रा प्रभात को पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस शैक्षणिक कार्यक्रम में डॉ. सुदामा प्रसाद धूमकेती, डॉ. बी.डी.कोष्टी, डॉ. रवि सिंह, डॉ. महेन्द्र कुशवाहा और डॉ. तरुणेन्द्र साकेत सहित महाविद्यालय के लगभग 43 विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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