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एमपी : जबलपुर से बनाये फर्जी जाति प्रमाण पत्र से नौकरी पाने वाली सिवनी की परियोजना अधिकारी बर्खास्त

जबलपुर/सिवनी। जिला पंचायत सिवनी में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे 16 वर्षों से नौकरी कर रही एक महिला संविदा अधिकारी को बर्खास्त कर दिया गया है। जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी अंजली शाह ने 31 मार्च को आदेश जारी करते हुए परियोजना अर्थशास्त्री (संविदा) वंदना मुडिय़ा की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। महिला ने जबलपुर से बना फर्जी जाति प्रमाण पत्र लगाया था.

साथ ही इनके खिलाफ थाना-डूंडासिवनी में धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज करने पत्र लिखा गया है। 2 अप्रैल को जिला पंचायत का पत्र लेकर लिपिक एफआईआर दर्ज कराने पुलिस थाना डूंडासिवनी पहुंचा था, लेकिन सीईओ द्वारा एफआईआर दर्ज कराने अधिकृत किए गए अधिकारी व विस्तृत जांच प्रतिवेदन उपलब्ध ना होने के कारण संबंधित लिपिक को डूंडासिवनी पुलिस ने वापस लौटा दिया था।

थाना प्रभारी चैनसिंह उइके ने बताया कि जिला पंचायत द्वारा अधिकृत व्यक्ति को आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने कहा गया है। सभी दस्तावेज प्राप्त होने पर संबंधित के खिलाफ संबंधित धाराओं एफआईआर दर्ज की जाएगी।

लोकायुक्त में हुई थी शिकायत

जानकारी के अनुसार पूरा प्रकरण लोकायुक्त कार्यालय भोपाल में दर्ज प्रकरण (क्रमांक 190/ई/2024) से जुड़ा है। लोकायुक्त को शिकायत मिली थी कि वंदना मुडिय़ा ने अपनी वास्तविक जाति छिपाकर एसटी वर्ग के कोटे से संविदा नौकरी हासिल की है। इसके बाद अक्टूबर 2024 में कलेक्टर के निर्देश पर एक जिला स्तरीय जांच दल का गठन किया गया था।

टीम ने जबलपुर पहुंचकर की जांच

 दल ने जबलपुर स्थित बाबू मनमोहन दास हितकारिणी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से जानकारी एकत्रित कर दस्तावेज प्राप्त किए। विद्यालय की टीसी व डिस्चार्ज पंजी (पृष्ठ-153) से यह तथ्य पाया गया कि विवाह से पूर्व उनका नाम वंदना कश्यप था और उनकी जाति ढीमर (अन्य पिछड़ा वर्ग) है। स्वयं मुडिय़ा ने 12 दिसंबर 2025 को जांच दल के समक्ष अपने बयान में ओबीसी (ढीमर) होने की पुष्टि की थी। परियोजना अर्थशास्त्री (संविदा) वंदना मुडिय़ा द्वारा फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनाकर शासकीय नौकरी प्राप्त करने संबंधी शिकायत जांच में सही पाई गई हैं। जिला पंचायत की सामान्य प्रशासन समिति की बैठक में पारित प्रस्ताव अनुसार परियोजना अर्थशास्त्री की संविदा सेवा समाप्त कर दी गई हैं। पुलिस में आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने पत्र लिखा गया है।

2008 में कैसे मिली थी नौकरी?

वर्ष 2008 में आउटसोर्स एजेंसी डी-नोवो के माध्यम से जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) में परियोजना अर्थशास्त्रियों की भर्ती की गई थी। एजेंसी ने जारी चयन सूची में वंदना मुडिय़ा का चयन अनुसूचित जनजाति- महिला (एसटी-महिला) वर्ग में दर्शाया था, इसके आधार पर उन्हें संविदा नियुक्ति दे दी गई थी। जानकारी के अनुसार बीते 18 वर्षों से परियोजना अर्थशास्त्री के पद पर वंदना मुडिय़ा कार्यरत थी।


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