जबलपुर। मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने दमोह जिले के विद्युत बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है। कंपनी ने 220 केवी सबस्टेशन दमोह में दशकों पुराने पावर ट्रांसफार्मर को हटाकर उसकी जगह उच्च क्षमता का नया ट्रांसफार्मर स्थापित किया है। इस तकनीकी अपग्रेडेशन के बाद जिले की कुल पारेषण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे आने वाले समय में बढ़ती बिजली की मांग को आसानी से पूरा किया जा सकेगा।
दशकों पुराने उपकरण को बदला गया
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता 43 साल पुराने 20 एमवीए क्षमता के ट्रांसफार्मर को बदलना है। इतने लंबे समय तक एक पावर ट्रांसफार्मर का क्रियाशील रहना कंपनी के उत्कृष्ट रख-रखाव, निरंतर मॉनिटरिंग और कुशल प्रबंधन का प्रमाण है। अब इस पुराने उपकरण के स्थान पर 50 एमवीए क्षमता का नया पावर ट्रांसफार्मर ऊर्जीकृत कर दिया गया है। इस बदलाव से अकेले दमोह सबस्टेशन की कुल क्षमता बढ़कर 650 एमवीए तक पहुंच गई है, जो क्षेत्र की पारेषण प्रणाली को नई मजबूती प्रदान करेगा।
बढ़ती मांग और आपूर्ति का बेहतर तालमेल
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के अनुसार लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से हुए इस कार्य का सीधा लाभ उपभोक्ताओं को मिलेगा। इस निवेश के माध्यम से जिले में बिजली आपूर्ति की स्थिरता और गुणवत्ता में बड़ा सुधार होने की उम्मीद है। वर्तमान में कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ती बिजली की खपत को देखते हुए यह विस्तार भविष्य की जरूरतों के लिए भी पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराएगा। इस क्षमता वृद्धि के बाद दमोह जिले की कुल पारेषण क्षमता अब 1083 एमवीए हो गई है।
तकनीकी आधुनिकीकरण से बढ़ेगी विश्वसनीयता
पारेषण कंपनी द्वारा विभिन्न सबस्टेशनों पर किए जा रहे आधुनिकीकरण के कार्यों की श्रृंखला में यह एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। नया ट्रांसफार्मर लगने से न केवल तकनीकी नुकसान में कमी आएगी, बल्कि निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी। जनसंपर्क अधिकारी शशिकांत ओझा के माध्यम से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस क्षमता वृद्धि का लाभ दमोह शहर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों के हजारों उपभोक्ताओं को मिलेगा। इससे लो वोल्टेज और ट्रिपिंग जैसी समस्याओं से काफी हद तक निजात मिल सकेगी।
