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जिले में नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास का रास्ता साफ, कलेक्टर ने दिए भूमि आवंटन के आदेश



जबलपुर। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में उद्योग, रोजगार और कौशल विकास विभाग के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक के दौरान कलेक्टर ने जिले में नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए चिन्हित की गई भूमि के आवंटन की प्रक्रिया को तत्काल पूरा करने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि स्टार्टअप्स और एमएसएमई द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए ताकि स्थानीय उत्पादों को बड़ा बाजार मिल सके।

खाद्य प्रसंस्करण व निवेश प्रोत्साहन पर जोर

​बैठक में कलेक्टर ने जिले में खाद्य प्रसंस्करण क्लस्टर की स्थापना की प्रगति की समीक्षा करते हुए भूमि चिन्हांकन का कार्य शीघ्र पूर्ण करने को कहा। उन्होंने निवेश में रुचि रखने वाले उद्यमियों से चर्चा कर उनके प्रस्ताव प्राप्त करने के निर्देश दिए। जिले में सिंघाड़े के भारी उत्पादन को देखते हुए उन्होंने इसकी प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने की संभावनाएं तलाशने पर विशेष जोर दिया। इसके साथ ही निवेश प्रोत्साहन केंद्र में आयोजित कॉफी विद एक्सपर्ट्स कार्यक्रम में शामिल होने वाले निवेशकों से एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट प्राप्त करने की प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए गए। बैठक में उप संचालक रोजगार एम एस मरकाम और संभागीय आईटीआई प्राचार्य अर्पित शुक्ला भी मौजूद थे।

विभिन्न तहसीलों में भूमि आवंटन की प्रक्रिया

​जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक विनीत कुमार रजक ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत बीते वित्तीय वर्ष में 384 के लक्ष्य के मुकाबले 514 हितग्राहियों को ऋण दिलाया गया, जो लक्ष्य से 34 प्रतिशत अधिक है। चालू वित्तीय वर्ष में 430 युवाओं को लाभान्वित करने का लक्ष्य निर्धारित कर बैंकों को आवंटित कर दिया गया है। रांझी तहसील के मोहनिया में एमएसएमई विभाग की 25 एकड़ भूमि के विकास के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा अधारताल के कठौन्दा, पनागर के झुरझुरु, पाटन के ककरहटा और शहपुरा के झांसी में नए औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भूमि आवंटन की कार्यवाही अंतिम चरणों में है।

स्वरोजगार और प्लेसमेंट की मॉनिटरिंग

​कलेक्टर ने रोजगार विभाग की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि प्लेसमेंट प्राप्त करने वाले युवाओं की ट्रैकिंग की जाए कि उनमें से कितने वर्तमान में नौकरी कर रहे हैं। आईटीआई से प्रशिक्षण ले चुके युवाओं को स्वरोजगार की गतिविधियों से जोड़ने और मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना के अंतर्गत स्थानीय औद्योगिक संस्थानों को अधिक से अधिक संख्या में शामिल करने को कहा गया। आगामी बैठक में कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य, पशुपालन, तकनीकी शिक्षा संस्थानों और कृषि विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों को भी बुलाने के निर्देश दिए गए ताकि स्वरोजगार के क्षेत्र में समन्वित प्रयास किए जा सकें। 

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