कांग्रेस कमेटी की प्रदेश प्रवक्ता ज्योति पटेल ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि महिला आरक्षण का मुद्दा केवल राजनीतिक लक्ष्यों को साधने का बहाना है। विपक्ष का तर्क है कि वर्ष 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम अब कानून बन चुका है, इसलिए इसे लागू करने में और देरी उचित नहीं है। विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि मौजूदा लोकसभा की 545 सीटों में से 33त्न सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएं और इसे 2029 के आम चुनाव से ही लागू किया जाए। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से जोड़कर दो शर्तों पर टाल दिया है। उनका कहना है कि नया परिसीमन नई जनगणना और जातिगत जनगणना के बाद ही किया जाना चाहिए, न कि 2011 के आंकड़ों के आधार पर। विपक्षी दलों ने भाजपा पर महिला मुद्दों के प्रति संवेदनहीनता का आरोप भी लगाया। उन्होंने दावा किया कि स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण देने का काम पूर्व में कांग्रेस सरकार ने 73वें और 74वें संविधान संशोधन के जरिए किया था, जिससे लाखों महिलाएं आज नेतृत्व की भूमिका में हैं। हालांकि, भाजपा लगातार यह कहती रही है कि महिला आरक्षण लागू करने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया का पालन आवश्यक है और जनगणना व परिसीमन इसके अहम चरण हैं। महिला आरक्षण को लेकर जारी यह राजनीतिक गतिरोध आने वाले समय में और तेज होने के संकेत दे रहा है।
जबलपुर। महिला आरक्षण बिल को लेकर आरोप-प्रत्यारोप के दौर शुरु हो गए है। मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस कमेटी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को जनगणना और परिसीमन से जोड़कर लागू करने में देरी की जा रही है।
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