जबलपुर। मध्य प्रदेश में गेहूं उपार्जन प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आने वाले दिनों में प्रदेश के विभिन्न केंद्रों का औचक निरीक्षण करेंगे। मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर किसी भी जिले के उपार्जन केंद्र पर अचानक उतर सकता है जहां वे सीधे किसानों से संवाद कर व्यवस्थाओं का फीडबैक लेंगे। शासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भीषण गर्मी के बीच केंद्रों पर किसानों के लिए पीने के पानी, छायादार बैठक व्यवस्था और अन्य अनिवार्य सुविधाएं सुचारू रूप से संचालित हों। इस वर्ष किसानों की सुविधा के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अब किसान जिले के किसी भी केंद्र पर अपनी उपज बेच सकते हैं और तौल में देरी न हो इसके लिए कांटों की संख्या बढ़ाकर 6 कर दी गई है। जिला प्रशासन को आवश्यकतानुसार इन कांटों को और बढ़ाने के अधिकार भी दिए गए हैं। स्लॉट बुकिंग की सीमा 1000 क्विंटल से बढ़ाकर 2250 क्विंटल की गई है जिसे जिला स्तर पर 3000 क्विंटल तक विस्तारित किया जा सकता है।
बोनस के साथ 2625 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान और एफएक्यू मानदंडों में बड़ी राहत
राज्य सरकार किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करने हेतु 2585 रुपये समर्थन मूल्य पर 40 रुपये बोनस मिलाकर कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान कर रही है। उपज की गुणवत्ता को लेकर भी नियमों में ढील दी गई है। चमक विहीन गेहूं को 50 प्रतिशत तक और सुकड़े हुए दानों को 10 प्रतिशत तक स्वीकार करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही क्षतिग्रस्त दानों की सीमा को 6 प्रतिशत किया गया है। खरीदी केंद्रों पर बारदाने, हम्माल, सिलाई मशीन और इंटरनेट कनेक्टिविटी जैसी तकनीकी आवश्यकताओं को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है। शनिवार को भी खरीदी प्रक्रिया जारी रखने का निर्णय लिया गया है ताकि उपार्जन समय पर पूरा हो सके। जनसंपर्क विभाग के माध्यम से केंद्रों पर प्रचार सामग्री लगाकर किसानों को उनके अधिकारों और सरकार की योजनाओं के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
