जबलपुर। बिजली कम्पनी में मैनपावर सप्लाई करने वाली फर्म मेसर्स रतन एम्पोरियम धार द्वारा खुद को आर्थिक रूप से अक्षम घोषित करने के बाद विभाग ने कड़ी कार्रवाई करते हुए उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया है। जबलपुर के मुख्य अभियंता एसके गिरिया की विशेष पहल पर लिए गए इस निर्णय के तहत अब संबंधित फर्म के अधीन कार्यरत रहे सैकड़ों आउटसोर्स कर्मचारियों को अन्य सक्रिय ठेका कंपनियों में समायोजित किया जाएगा। इस प्रशासनिक फेरबदल से न केवल कर्मचारियों का रोजगार सुरक्षित हुआ है बल्कि उनके लंबे समय से रुके हुए बकाया वेतन के भुगतान का रास्ता भी साफ हो गया है। विभाग अब भविष्य के लिए ऐसे कड़े नियम तैयार कर रहा है जिससे आउटसोर्सिंग कंपनियां दोबारा इस तरह की मनमानी न कर सकें।
लापरवाह फर्म पर कानूनी शिकंजा, ब्लैक लिस्ट की तैयारी
मुख्य अभियंता एसके गिरिया और अधीक्षण अभियंता खुशयाल शिववंशी ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभालते हुए रतन एम्पोरियम के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही शुरू की है। विभाग ने अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन और श्रमिकों के आर्थिक शोषण के गंभीर आरोपों में कंपनी की बैंक गारंटी जब्त करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही फर्म को भविष्य के लिए ब्लैक लिस्ट करने की प्रक्रिया भी अपनाई जा रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अनुबंध की धारा 20.2 का उपयोग करते हुए 21.05.2025 को जारी किए गए कार्यादेश को तत्काल प्रभाव से शून्य कर दिया गया है। कंपनी से विभाग को हुए नुकसान और अतिरिक्त लागत की वसूली भी नियमानुसार की जाएगी।
वेतन संकट से व्याप्त था आक्रोश
संबंधित ठेका कंपनी ने सितंबर 2025, फरवरी 2026 और मार्च 2026 का वेतन भुगतान समय पर नहीं किया था। विभाग द्वारा बार-बार चेतावनी और नोटिस जारी किए जाने के बाद भी जब कंपनी ने हाथ खड़े कर दिए, तो कर्मचारियों में गहरा असंतोष फैल गया। वेतन न मिलने के कारण जबलपुर ओएंडएम सर्किल के अंतर्गत आने वाले तीनों संभागों में बिजली आपूर्ति और तकनीकी कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। श्रमिक संगठनों के बढ़ते विरोध और मैदानी स्तर पर पैदा हुए गतिरोध को देखते हुए मुख्य अभियंता ने इस संवेदनशील मामले में त्वरित हस्तक्षेप किया और कर्मचारियों के हित में समायोजन की प्रक्रिया को हरी झंडी दी।
मर्जर से सुरक्षित हुआ श्रमिकों का भविष्य
कम्पनी ने रतन एम्पोरियम के अधीन काम करने वाले सभी कुशल, अर्धकुशल और अकुशल कर्मचारियों को अन्य सक्रिय ठेका फर्मों के साथ जोड़ने का काम पूरा कर लिया गया है। इस मर्जर के बाद अब इन कर्मियों को नई कंपनियों के माध्यम से नियमित वेतन मिलना शुरू होगा। विभाग ने यह सुनिश्चित किया है कि ट्रांजिशन के दौरान किसी भी कर्मचारी की छंटनी न हो और उन्हें उनके अनुभव के अनुसार उचित स्थान मिले। इस पारदर्शी प्रक्रिया से बिजली कंपनी के संचालन में आने वाली बाधाएं दूर हो गई हैं और कर्मचारियों का भविष्य भी पूरी तरह सुरक्षित हो गया है।
आउटसोर्सिंग नीति में कड़े नियमों की तैयारी
इस पूरे घटनाक्रम के बाद बिजली विभाग अब आउटसोर्सिंग के लिए नई और सख्त गाइडलाइन बनाने पर विचार कर रहा है। विभाग का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था स्थापित करना है जिसमें ठेका कंपनियां अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला न झाड़ सकें। नए नियमों के तहत कंपनियों की वित्तीय स्थिति की नियमित जांच और वेतन भुगतान की प्रत्यक्ष निगरानी जैसे प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं। विभाग का मानना है कि भविष्य में केवल उन्हीं कंपनियों को अवसर दिया जाएगा जिनका ट्रैक रिकॉर्ड बेहतर हो, ताकि दोबारा कर्मचारियों के सामने जीवन यापन का संकट खड़ा न हो।
