khabar abhi tak

केंद्रीय कर्मचारियों की बड़ी डिमांड : न्यूनतम वेतन 50,000 से 72,000 करने और OPS की बहाली का प्रस्ताव

नई दिल्ली. 8वें वेतन आयोग को लेकर देश भर के केंद्रीय कर्मचारी संगठनों की उम्मीदें तेज हो गई हैं. विभिन्न कर्मचारी संघों ने सरकार को विस्तृत प्रस्ताव सौंपे हैं, जिनमें वेतन, भत्तों और सेवानिवृत्ति लाभों में बड़े बदलाव की मांग की गई है. यदि ये सिफारिशें स्वीकार कर ली जाती हैं, तो लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है.

न्यूनतम वेतन में तीन गुना तक बढ़ोतरी की मांग

प्रगतिशील शिक्षक न्याय मंच (पीएसएनएम) ने लेवल-1 के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम बेसिक पे को वर्तमान 18,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000-60,000 रुपये करने का प्रस्ताव दिया है. वहीं, भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (बीपीएमएस) ने और भी आक्रामक रुख अपनाते हुए इसे चार गुना बढ़ाकर 72,000 रुपये करने की मांग की है. इसके साथ ही, शीर्ष पदों के लिए अधिकतम वेतन 10 लाख तक तय करने का सुझाव दिया गया है.

फिटमेंट फैक्टर और इंक्रीमेंट पर जोर

कर्मचारी संगठनों ने फिटमेंट फैक्टर को मौजूदा 2.57 से बढ़ाकर 2.62 से 4.0 के बीच करने की मांग की है. इसके अलावा, बढ़ती महंगाई और जीवन यापन की लागत को देखते हुए वार्षिक वेतन वृद्धि को भी वर्तमान 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 6 से 7 प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया गया है.

महंगाई भत्ता और अन्य भत्ते

प्रस्ताव में कहा गया है कि जब महंगाई भत्ता (डीए) 50 प्रतिशत को पार कर जाए, तो उसे बेसिक पे में मर्ज कर दिया जाना चाहिए. अन्य प्रमुख मांगों में शामिल हैं-

बच्चों का शिक्षा भत्ता: इसे वर्तमान 2,800 से बढ़ाकर 7,000 प्रति माह करना.

एचआरए में संशोधन: हाउस रेंट अलाउंस को 12 प्रतिशत, 24 प्रतिशत और 36 प्रतिशत की श्रेणियों में रखने का सुझाव.

नया डिजिटल भत्ता: डिजिटल कामकाज को देखते हुए 2,000 प्रति माह का डिजिटल सपोर्ट अलाउंस.

लीव एनकैशमेंट: अर्जित अवकाश के बदले पैसे लेने की सीमा को 300 से बढ़ाकर 400 दिन करना.

ओपीएस की बहाली और सामाजिक सुरक्षा

वेतन वृद्धि के साथ-साथ, लगभग सभी कर्मचारी संघों ने नई पेंशन योजना (एनपीएस) के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को बहाल करने की मांग को दोहराया है. संगठनों का तर्क है कि कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ओपीएस अनिवार्य है. साथ ही, वेतन गणना के लिए परिवार की इकाई को तीन से बढ़ाकर पांच सदस्य करने का सुझाव दिया गया है ताकि वेतन का निर्धारण अधिक सटीक हो सके.

सरकार के सामने वित्तीय चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि जहां ये मांगें कर्मचारी कल्याण के लिए महत्वपूर्ण हैं, वहीं इन्हें लागू करने से सरकारी खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा. अब सबकी नजरें 8वें वेतन आयोग के संभावित गठन और उसके द्वारा संतुलित वित्तीय स्थिरता और कर्मचारी हितों के बीच बनाए जाने वाले सामंजस्य पर टिकी हैं.

Post a Comment

Previous Post Next Post
khabar abhi tak
khabar abhi tak
khabar abhi tak