भोपाल. मध्य प्रदेश में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) से जुड़े करीब 30 हजार आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। वेतन संकट और अधिकारों की अनदेखी से नाराज इन कर्मचारियों ने 4 मई 2026 से चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पडऩे की आशंका है। प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा सकती है।
कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले 5-6 महीनों से उन्हें नियमित वेतन नहीं मिल रहा है जिसके चलते जीवन यापन करन मुश्किल हो रहा है। अल्प वेतन के साथ वेतन विसंगतियां, एनपीएस, स्वास्थ्य बीमा, अवकाश और महंगाई भत्ते जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी उन्हें वंचित रखा जा रहा है। मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह ने कहा है कि यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो यह आंदोलन और उग्र होगा। इससे स्वास्थ्य सेवाएं व्यवस्था चरमराती है, तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
स्वास्थ्य कर्मचारी ऐसे करेंगे प्रदर्शन
-प्रथम चरण (4 मई): प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी एकत्र होंगे और राज्यपाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगे।
-द्वितीय चरण (18 मई): सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (ष्टरू॥ह्र) कार्यालयों पर प्रमुख सचिव के नाम ज्ञापन दिया जाएगा।
-तृतीय चरण (25 मई): यदि मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो 25 मई से भोपाल में उपमुख्यमंत्री के बंगले के सामने अनिश्चितकालीन क्रमिक भूख हड़ताल शुरू की जाएगी।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये प्रतिमाह तय किया जाए।
उत्तर प्रदेश और हरियाणा की तर्ज पर निगम/मंडल का गठन किया जाए।
विभाग में खाली पड़े समकक्ष पदों पर इन अनुभवी कर्मचारियों को नियमित किया जाए।
पिछले कई महीनों से लंबित पड़े वेतन का तुरंत भुगतान सुनिश्चित हो।
आउटसोर्स कर्मचारियों को मूलभूत सुविधाएं दी जाएं।
