विद्युत कर्मचारियों और पेंशनर्स की मांगों को लेकर मुख्यमंत्री व ऊर्जा मंत्री को प्रेषित किया मांग पत्र
जबलपुर। मध्यप्रदेश विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन ने प्रदेश की बिजली कंपनियों में कार्यरत संविदा, आउटसोर्स और नियमित कर्मचारियों सहित पेंशनर्स की लंबित समस्याओं के निराकरण के लिए शासन को विस्तृत मांग पत्र भेजा है। फेडरेशन के महामंत्री राकेश डी पी पाठक ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा और सीएमडी पावर मैनेजमेंट कंपनी को संबोधित इस पत्र में विभिन्न संवर्गों की ज्वलंत समस्याओं को रेखांकित किया है। संगठन की प्रमुख मांग है कि बिजली कंपनियों में 15 वर्षों से रिक्त पदों के विरुद्ध कार्यरत संविदा कर्मचारियों को अनुभव के आधार पर बिना किसी परीक्षा के नियमित कर उनका संविलयन किया जाए। इसी प्रकार लंबे समय से सेवाएं दे रहे आउटसोर्स कर्मियों के नियमितीकरण की दिशा में भी ठोस कदम उठाने की आवश्यकता जताई गई है।
वेतन विसंगति दूर करने और गृह जिला स्थानांतरण नीति लागू करने पर बल
राकेश पाठक ने वर्ष 2009 से 2018 के बीच नियुक्त परीक्षण, संयंत्र और कार्यालय सहायकों की वेतन विसंगति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ग्रेड पे 1900 के स्थान पर 2500 अथवा मूल वेतन 20200 की जगह 25300 करते हुए 03 वेतन वृद्धि प्रदान की जाएं। उन्होंने बताया कि ऊर्जा विभाग इस संबंध में आदेश जारी कर चुका है, लेकिन कंपनियों ने अब तक इसे लागू नहीं किया है। इसके साथ ही तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी सहित संविदा कर्मचारियों के लिए वन टाइम गृह जिला स्थानांतरण नीति लागू करने और 1991 के कर्मचारियों से संबंधित उच्चतम न्यायालय के वेतन विसंगति निर्णय को सभी कंपनियों में प्रभावी करने की मांग की गई है। उच्च शिक्षा प्राप्त लाइन परिचारकों को कनिष्ठ अभियंता भर्ती में आरक्षण देने और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश की तर्ज पर अलग निगम बनाने का प्रस्ताव भी दिया गया है ताकि तकनीकी रूप से प्रशिक्षित लोगों को रोजगार मिले और दुर्घटनाएं कम हों।
अनुकंपा नियुक्ति नियमों में सुधार और पेंशन गारंटी की मुख्य मांग
फेडरेशन ने वर्ष 2000 से 2012 के मध्य सामान्य मृत्यु के प्रकरणों में लंबित अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करने और कार्यालय सहायक श्रेणी 3 के पद को पुनर्जीवित करने का आग्रह किया है। कर्मचारियों व पेंशनर्स को बिजली बिल में 50 प्रतिशत छूट बहाल करने, वर्ष 2018 के बाद नियुक्त कार्यालय सहायकों का वेतन पूर्व निर्धारित मान के अनुसार फिक्स करने और समान कार्य-समान वेतन के न्यायिक निर्णय के तहत 70, 80, 90 प्रतिशत के स्थान पर पूर्ण वेतन देने की बात कही गई है। धारा 49/6 की गलत व्याख्या समाप्त कर पेंशनर्स को महंगाई भत्ते का लाभ देने और राज्य शासन द्वारा पेंशन की पूर्ण गारंटी लेने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है। इस बैठक में अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह राजपूत, उमाशंकर मेहता, एन के यादव, बी एस राठौर, रामेश्वर गांगे, आर के कौशिक, अवसार अहमद, सूरज मल आर्य, गोपाल चौहान, जे एल जोशी, मदन वर्मा, वीरेंद्र मिश्रा, सुनील पटेल, प्रियंका यादव, कार्तिक शर्मा, पुष्पराज सिंह, ए के पांडे और डी के माथुर सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
