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जबलपुर: बिजली विभाग एक्शन मोड में: पुराने रिकॉर्ड्स से खोजे जा रहे साढ़े 19 करोड़ रुपये के देनदार


जबलपुर में बिजली बकायेदारों की शामत, जीआईएस टैगिंग से ढूंढ निकाले जाएंगे डिफाल्टर,​समाधान योजना की ढाल लेकर फील्ड में उतरी बिजली विभाग की विशेष टीमें

जबलपुर। जबलपुर शहर में विद्युत वितरण कंपनी ने एक बड़ा वित्तीय ऑपरेशन शुरू किया है। इस शनिवार को शहर के पांचों संभागों में उन उपभोक्ताओं के विरुद्ध मोर्चा खोला जाएगा, जिनके बिजली कनेक्शन वर्षों पहले स्थायी रूप से काटे जा चुके हैं। विभाग ने ऐसे 39018 डिफाल्टरों की कुंडली तैयार की है, जो मीटर कटने के बाद राशि डकार कर बैठे हैं। इन पर विभाग का कुल 19.50 करोड़ रुपया बकाया है। पिछले तीन दिनों से कार्यालयों में धूल फांक रही फाइलों को निकालकर ऐसे लोगों की सूची को अंतिम रूप दिया गया है, जो विभाग की समाधान योजना का लाभ लेकर कानूनी कार्रवाई से बच सकते हैं। अधीक्षण अभियंता संजय अरोरा ने आज अमले के साथ मीटिंग कर रणनीति तैयार की।

​ये है संभागवार बकाया रकम का गणित


विभागीय आंकड़ों का सूक्ष्म विश्लेषण करें तो शहर का पूर्व संभाग सबसे बड़े डिफॉल्ट जोन के रूप में उभरा है। यहां 10778 उपभोक्ताओं पर 4.89 करोड़ की राशि शेष है। इसी प्रकार दक्षिण संभाग में 8364 उपभोक्ताओं पर 4.89 करोड़, उत्तर संभाग में 6362 लोगों पर 4.59 करोड़, पश्चिम संभाग में 8661 उपभोक्ताओं पर 2.60 करोड़ और विजयनगर संभाग के 4853 बकायादारों पर 2.24 करोड़ रुपये की देनदारी है। यह वह राशि है जिसे विभाग ने एक तरह से मृत मान लिया था, लेकिन अब इसे वापस लाने के लिए जमीनी स्तर पर घेराबंदी की जा रही है।

​मीटर रीडर बनेंगे विभाग के गुप्तचर

​अधीक्षण अभियंता संजय अरोरा ने इस बार वसूली के लिए एक परंपरागत लेकिन सटीक तरीका अपनाया है। उन्होंने अपने कार्यालय में पांचों संभागों के अनुभवी लाइन स्टाफ और मीटर रीडरों की विशेष क्लास ली है। तर्क यह है कि लंबे समय से एक ही बीट पर काम करने के कारण इन कर्मचारियों को उन उपभोक्ताओं के वर्तमान ठिकानों और आर्थिक स्थिति की सटीक जानकारी है जिनके मीटर वर्षों पहले उखाड़े जा चुके हैं। डिजिटल डेटा के साथ-साथ इन कर्मचारियों के व्यावहारिक अनुभव को मिलाकर एक सटीक रिकवरी रूट तैयार किया गया है, ताकि वसूली की दर को शत-प्रतिशत तक ले जाया जा सके।

​रिकवरी के सफल प्रकरणों से बढ़ी उम्मीदें

​विभाग द्वारा हाल ही में की गई प्रारंभिक कार्रवाई के परिणाम चौंकाने वाले रहे हैं। तिलवारा बायपास क्षेत्र के मेसर्स जलाराम (कनेक्शन 1858005578) पर वर्ष 2019 से 77770 रुपये बकाया थे, जिनसे सफलतापूर्वक 36568 रुपये वसूल किए गए। इसी तरह सिविक सेंटर के मोहम्मद माजिद मुल्तानी के 2020 से लंबित प्रकरण में 44004 रुपये की रिकवरी हुई। अनंतारा के शैलेंद्र जैन से 25979 रुपये, रांझी के देवेंद्र कुमार मेहरोलिया से 35985 रुपये और कठौदा के करन पटेल से 64295 रुपये की वसूली की गई है। इन सभी मामलों में खास बात यह रही कि विभाग ने सख्ती के साथ-साथ समाधान योजना का लाभ भी दिया।

​आधुनिक तकनीक से दक्षता सर्वे का मेल

​पुराने बकायादारों को ट्रैक करने के लिए केवल कागजों पर निर्भरता खत्म कर दी गई है। विभाग अब जीआईएस टैगिंग और दक्षता सर्वे ऐप का उपयोग कर रहा है। इसके जरिए उन परिसरों की पहचान की जा रही है जहां पूर्व में बिजली काटी गई थी। अधिकारियों का मानना है कि कई मामलों में उपभोक्ता परिसर बदल लेते हैं या नाम बदलकर नया कनेक्शन लेने की कोशिश करते हैं। तकनीक के माध्यम से ऐसे सभी लूपहोल्स को बंद किया जा रहा है ताकि बकाया राशि की वसूली सुनिश्चित हो सके और विभाग के वित्तीय घाटे को कम किया जा सके।

​भारी-भरकम सरचार्ज से मुक्ति का अवसर

​इस पूरे अभियान का दूसरा पहलू उपभोक्ताओं को दी जा रही बड़ी राहत है। समाधान योजना के तहत विभाग पुराने बकायादारों को सरचार्ज में बड़ी छूट दे रहा है। उदाहरण के तौर पर जलाराम को 51503 रुपये और मुल्तानी को 14916 रुपये की सीधी छूट मिली। विभाग की मंशा है कि दंडात्मक कार्रवाई से पहले उपभोक्ताओं को एक सुनहरा मौका दिया जाए ताकि वे अपनी वर्षों पुरानी देनदारी का सम्मानजनक निपटारा कर सकें। शनिवार का अभियान इसी दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है, जिसमें विभाग और उपभोक्ता दोनों के हितों का संतुलन रखा गया है।

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