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एमपी में डेढ़ लाख शिक्षकों को दिखाया जा सकता है बाहर का रास्ता, विभाग लेगा एग्जाम, फेल हुए तो गई नौकरी

 

जबलपुर/भोपाल। एमपी में करीब डेढ़ लाख शिक्षकों की नौकरी पर संकट के बादल मंडराने लगे है। स्कूल शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर कहा है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू होने से पहले हुई थी। उन्हें सेवा में बने रहने के लिए टीईटी (टीचर एलिजबिलिटी टेस्ट) पास करना अनिवार्य होगा।

                                 लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल ने हाल ही में सभी संभागीय संयुक्त संचालकों व जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। इसके अनुसार ऐसे शिक्षक जिनकी सेवानिवृत्ति में अभी 5 साल से ज्यादा समय बचा हैए उन्हें अनिवार्य रूप से टीईटी परीक्षा देनी होगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने यह कदम सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर उठाया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित शिक्षकों को आदेश जारी होने की तारीख से दो साल के भीतर टीईटी परीक्षा पास करना अनिवार्य होगा। अगर कोई शिक्षक तय समय सीमा में टीईटी पास नहीं करता है तो उसे सेवा से हटाया जा सकता है।

जुलाई-अगस्त 2026 में प्रस्तावित परीक्षा-

संचालनालय ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे प्राथमिक-माध्यमिक स्कूलों में कार्यरत ऐसे शिक्षकों की पहचान कर उन्हें परीक्षा में शामिल होने की सूचना दें। शिक्षा विभाग के अनुसार टीईटी परीक्षा जुलाई-अगस्त 2026 में आयोजित करने का प्रस्ताव है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि नियुक्ति या पदोन्नति के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए भी टीईटी पास होना अनिवार्य रहेगा। इस आदेश को लेकर आउटसोर्स कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने स्कूल शिक्षा विभाग के हालिया आदेश को शिक्षकों के लिए बेहद चिंताजनक बताया है। अध्यापक संवर्ग 1995 से स्कूलों में पढ़ा रहा है। उनकी नियुक्तियां मेरिट के आधार पर हुई थीं। 2005 तक मेरिट के आधार पर भर्ती होती रहीए जबकि इसके बाद 2011 तक व्यापमं के माध्यम से पात्रता परीक्षा के जरिए नियुक्तियां की गईं। अब शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के नियमों के आधार पर इन शिक्षकों के लिए परीक्षा पास करना अनिवार्य किया जा रहा है।

कर्मचारी संगठनों ने शुरू किया विरोध-

इस आदेश के बाद शिक्षक संगठनों में आक्रोश व्याप्त है, कर्मचारी संगठनों का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को इस तरह परीक्षा के आधार पर हटाना उचित नहीं है। संगठन सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर करने की तैयारी भी कर रहे हैं। 

सीएम राइज योजना से स्कूल बंद होने का आरोप-

वासुदेव शर्मा का आरोप है कि सीएम राइज स्कूल योजना के कारण छोटे सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि इससे आने वाले समय में बड़ी संख्या में शिक्षक सरप्लस हो सकते हैं, जिससे नौकरी पर संकट खड़ा हो सकता है।


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