khabar abhi tak

डिपो से निकला असली डीजल, टैंक में पहुँचा नकली: डिटर्जेंट और केरोसिन के खेल का पर्दाफाश!

 



जबलपुर-सिवनी नेशनल हाईवे पर डीजल चोरी का पर्दाफाश: मिलावट के जरिए वाहन मालिकों को लग रहा करोड़ों का चूना

जबलपुर। नेशनल हाईवे पर संचालित ढाबों में अवैध रूप से ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण और बिक्री के खिलाफ पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। शाहपुरा से सिवनी की ओर जा रहे टैंकरों से ईंधन चोरी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने बिजना-मुटिया स्थित एक ढाबे पर छापा मारा। इस दौरान मौके से 100 लीटर अवैध डीजल जब्त किया गया और एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि डिपो से पेट्रोल पंपों तक ईंधन ले जाने वाले टैंकर चालक रास्ते में संगठित तरीके से इस चोरी को अंजाम दे रहे हैं।

​डिटर्जेंट और केरोसिन से मिलावट का खतरनाक खेल

​टैंकर से डीजल निकालने के बाद उसकी मात्रा को टैंक में पूरा दिखाने के लिए चालक इसमें केरोसिन और डिटर्जेंट पाउडर मिला देते हैं। डिटर्जेंट मिलाने के पीछे एक सोची-समझी तकनीकी साजिश होती है। जब वाहन सड़क पर चलता है, तो हिचकोले खाने से टैंक के भीतर डिटर्जेंट का भारी झाग बन जाता है। इस प्रक्रिया को लेकर जांच दल का कहना है कि 'जब पेट्रोल पंप पर कर्मचारी गेज डालकर माप लेते हैं, तो झाग की वजह से मीटर में ईंधन की मात्रा पूरी दिखाई देती है और चोरी पकड़ी नहीं जाती।' इसके अलावा डीजल की कमी को पूरा करने के लिए सस्ते केरोसिन का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है, जो ज्वलनशील होने के बावजूद इंजन के लिए अत्यंत हानिकारक है।

​हाइवे के ढाबों पर सक्रिय है संगठित सिंडिकेट

​नेशनल हाईवे पर स्थित दो दर्जन से अधिक गांवों के आसपास डीजल चोरी का यह अवैध कारोबार एक सुव्यवस्थित सिंडिकेट की तरह फल-फूल रहा है। इसमें केवल चालक ही नहीं, बल्कि कई बस मालिक, ट्रांसपोर्टर और रसूखदार किसान भी शामिल बताए जा रहे हैं। डिपो से टैंकर निकलते ही मोबाइल के जरिए ढाबा संचालकों और बिचौलियों से संपर्क साध लिया जाता है। नियमों के अनुसार, ज्वलनशील पदार्थ ले जाने वाले वाहन अपना निर्धारित मार्ग नहीं छोड़ सकते, लेकिन ये चालक सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर बस्तियों और ढाबों के भीतर वाहन ले जाते हैं। वहां चंद मिनटों के भीतर ही पंप और पाइप की मदद से सुरक्षित तरीके से ईंधन निकाल लिया जाता है।

​वाहनों की उम्र घटा रहा मिलावटी ईंधन

​इस मिलावटी खेल का सबसे गंभीर आर्थिक नुकसान वाहन मालिकों और आम जनता को उठाना पड़ रहा है। मिलावटी और झाग वाले डीजल के कारण वाहनों के नोजल, प्लग और फिल्टर बहुत जल्दी खराब हो रहे हैं। इसका सीधा नकारात्मक असर वाहन के इंजन और क्रैंक पर पड़ता है, जिससे मरम्मत का खर्च कई गुना बढ़ जाता है। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि 'जिस भारी वाहन को बेहतर रखरखाव के साथ कम से कम एक लाख किलोमीटर चलना चाहिए, वह इस मिलावटी ईंधन के कारण महज 25 से 40 हजार किलोमीटर के भीतर ही दम तोड़ रहा है।' पुलिस अब इस मामले में शामिल अन्य खरीदारों और मुख्य सरगनाओं की तलाश में जुटी है।

Post a Comment

Previous Post Next Post
khabar abhi tak
khabar abhi tak
khabar abhi tak