दीनी और दुनियावी तालीम पर जोर: शहर की प्रमुख मस्जिदों में अमन-चैन के लिए मांगी दुआ
जबलपुर। जबलपुर में ईदुल फितर का पर्व हर्षोल्लास और अकीदत के साथ मनाया जा रहा है। संस्कारधानी की विभिन्न ईदगाहों और मस्जिदों में हजारों की संख्या में मुस्लिम धर्मावलंबियों ने नमाज अदा की। रानीताल स्थित ईदगाह कला में मुख्य आयोजन हुआ, जहां मुफ्ती ए आजम मध्यप्रदेश हजरत मौलाना मुशाहिद रजा कादरी ने समाज को शिक्षा और घरेलू माहौल में सुधार का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मुसलमानों को कठिन दौर से गुजरना पड़ रहा है, ऐसे में पैगंबर ए इस्लाम की शिक्षाओं पर चलते हुए कुर्बानी के जज्बे को बरकरार रखना होगा। उन्होंने जकात की राशि का सही इस्तेमाल करने और गरीबों व यतीमों की मदद में देरी न करने की हिदायत दी।
रानीताल ईदगाह में उमड़ा जनसैलाब
रानीताल ईदगाह में सुबह से ही नमाजियों का आना शुरू हो गया था। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। ठीक 10:30 बजे मुफ्ती ए आजम के आगमन पर तकबीर के नारों से माहौल गूंज उठा। नमाज से पहले अपनी तकरीर में मौलाना मुशाहिद रजा कादरी ने बच्चों को दुनियावी तालीम के साथ-साथ दीनी तालीम दिलाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का स्तर ऊंचा करना और घरों के भीतर का वातावरण सुधारना वक्त की जरूरत है। उन्होंने युवाओं को माता-पिता का आज्ञाकारी बनने और बुजुर्गों के अनुभवों से सीख लेने की सलाह दी। इसके बाद नायबे मुफ्ती ए आजम हजरत सूफी जियाऊल हक कादरी बुरहानी ने नमाज संपन्न कराई, जिसमें लगभग 50 हजार लोग शामिल हुए।
शहर की विभिन्न मस्जिदों में अदा हुई नमाज
गोहलपुर स्थित मोमिन ईदगाह में सुबह 8:30 बजे हाफिज मोहम्मद ताहिर ने नमाज अदा कराई। यहां नमाजियों की तादाद इतनी अधिक थी कि मुख्य सड़क और उर्दू स्कूल के मैदान तक कतारें लगानी पड़ीं। इसी तरह सदर बाजार ईदगाह में सुबह 9 बजे हाफिज कारी सुल्तान अशरफी ने नमाज पढ़ाई। इस स्थान पर सेना की इकाइयों में कार्यरत मुस्लिम अधिकारियों, कर्मचारियों और रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के छात्रों ने विशेष रूप से शिरकत की। गढ़ा क्षेत्र की ईदगाह में हाफिज कारी मौलाना अमीर अशरफ ने नमाज की रस्म पूरी कराई, जहां मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर और छात्र भी शामिल हुए।
साम्प्रदायिक सौहार्द और आपसी मेल-मिलाप का दौर
नमाज के बाद दुआओं का दौर चला, जिसमें मुल्क की तरक्की, अमन और खुशहाली की कामना की गई। ईदगाह के बाहर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौलाना साहब और अन्य नमाजियों से गले मिलकर मुबारकबाद दी। सदर बाजार और गढ़ा जैसे क्षेत्रों में हिंदू धर्मावलंबियों ने मुस्लिम भाइयों का स्वागत किया और उन्हें गले लगाकर पर्व की बधाई दी। शहर की गंगा-जमुनी तहजीब का नजारा तब दिखा जब अलग-अलग धर्मों के लोग एक-दूसरे के घरों में सेवइयां खाने पहुंचे।
सुरक्षा के इंतजाम रहे चाक-चौबंद
फूटाताल स्थित शिया जामा मस्जिद जाकिर अली में सुबह 9:30 बजे मौलाना सैयद हैदर मेहंदी ने ईद की नमाज संपन्न कराई। नमाज के बाद शिया समुदाय के लोगों ने एक-दूसरे को मुबारकबाद पेश की। वहीं मदार टेकरी स्थित जामा मस्जिद जमीतुल कुरैश में हाफिज सादिक मिसबाही ने सुबह 9:30 बजे नमाज अदा कराई। उन्होंने अपने संबोधन में शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए समाज के हर वर्ग को शिक्षित होने का आह्वान किया। इन सभी स्थानों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे और पुलिस प्रशासन मुस्तैद नजर आया।
हर तरफ दिखा उल्लास का वातावरण
ईद की मिठास पूरे शहर की फिजा में घुली रही। नमाज के बाद बच्चों में खासा उत्साह देखा गया। छोटे बच्चों ने अपने बड़ों से ईदी प्राप्त की और मुस्लिम बस्तियों में लगे मेलों और झूलों का आनंद लिया। घरों में पकवानों का दौर दिन भर चलता रहा और दोस्तों व रिश्तेदारों की आवाजाही बनी रही। जनप्रतिनिधियों ने विभिन्न वार्डों और बस्तियों का दौरा कर नागरिकों को ईद की शुभकामनाएं दीं। शाम तक बाजारों और प्रमुख चौराहों पर चहल-पहल बनी रही, जिससे पूरा शहर उत्सव के रंग में डूबा नजर आया।

