जबलपुर। जबलपुर सहित प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत कंप्यूटर शिक्षकों के भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी ताजा निर्देशों के अनुसार, शैक्षणिक सत्र के अंत के साथ ही इन शिक्षकों की कार्य अवधि समाप्त की जा रही है। जानकारी के मुताबिक, इस निर्णय से प्रदेश भर के लगभग 6000 अतिथि शिक्षक सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इनकी सेवाएं केवल 31 मार्च तक ही ली जाएंगी।
विभाग ने जारी किए समय सीमा के निर्देश
लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा शैक्षणिक व्यवस्थाओं को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन जारी कर दी गई है। इसके तहत अतिथि शिक्षकों के मानदेय और उनकी उपस्थिति की समय सीमा निर्धारित की गई है। अधिकारियों का तर्क है कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 के समापन के साथ ही अतिथि शिक्षकों की आवश्यकता भी समाप्त हो जाती है। इस प्रक्रिया के तहत 31 मार्च की तिथि को अंतिम कार्य दिवस माना गया है। इसके बाद बिना किसी विशेष आदेश के इन शिक्षकों को विद्यालय में उपस्थिति दर्ज कराने की अनुमति नहीं होगी। बजट आवंटन और मानदेय भुगतान की गणना भी इसी तिथि तक सुनिश्चित की गई है।
कंप्यूटर शिक्षा व कौशल विकास पर असर
राज्य के विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इन 6000 अनुदेशकों की नियुक्ति की गई थी। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को तकनीक से जोड़ने में इन शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सत्र के बीच में या अंत में इस प्रकार सेवा समाप्ति के आदेश से न केवल शिक्षकों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी, बल्कि स्कूलों में संचालित होने वाले आईटी प्रोजेक्ट्स पर भी विराम लग सकता है। विभाग के इस कदम से उन युवाओं में निराशा है जो लंबे समय से संविदा या स्थायीकरण की आस लगाए बैठे थे। वर्तमान में इन पदों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी स्पष्ट नहीं की गई है।
सरकार से लगाई पुनर्विचार की गुहार
6000 कंप्यूटर अतिथि शिक्षकों ने सरकार से अपनी नीति पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। शिक्षकों का कहना है कि सत्र समाप्ति के बाद भी कई प्रशासनिक और तकनीकी कार्य शेष रहते हैं, जिनमें उनकी सेवाएं ली जा सकती हैं। हालांकि, विभागीय स्तर पर फिलहाल केवल 31 मार्च तक की सेवाओं का ही प्रावधान किया गया है। आने वाले नए शैक्षणिक सत्र में इन पदों पर पुनः भर्ती होगी या पुराने शिक्षकों को ही प्राथमिकता दी जाएगी, इस पर अभी संशय बना हुआ है। कहा जा रहा है कि यदि विभाग अपने रुख में बदलाव नहीं करता है, तो हजारों परिवार आर्थिक अनिश्चितता के दौर में प्रवेश कर जाएंगे।
