लाइसेंस रद्द होने का संकट,आबकारी विभाग की कार्यवाही के खिलाफ है याचिका
जबलपुर। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित सोम डिस्टिलरीज के लाइसेंस निलंबन का मामला अब एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। कंपनी प्रबंधन ने पूर्व में सिंगल बेंच द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ अपील दायर की है। यह अपील अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच के समक्ष प्रस्तुत की गई है। इस मामले की गंभीरता और कानूनी पेचीदगियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह मामला अब तक 4 अलग-अलग जजों की सुनवाई की प्रक्रिया से गुजर चुका है। सिंगल बेंच से तत्काल राहत पाने में विफल रहने के बाद कंपनी ने उच्च पीठ का दरवाजा खटखटाया है। अब इस पूरे प्रकरण की विस्तृत समीक्षा मुख्य न्यायाधीश की बेंच द्वारा की जाएगी।
-न्यायिक प्रक्रिया:अब तक क्या हुआ
सोम डिस्टिलरीज के इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया काफी लंबी और उतार-चढ़ाव भरी रही है। शुरुआत में यह मामला विभिन्न बेंचों के सामने सूचीबद्ध हुआ लेकिन किन्हीं कारणों से 4 जजों की सुनवाई से यह मामला दूर रहा। कानूनी जानकारों के अनुसार जब किसी बड़े औद्योगिक समूह का लाइसेंस निलंबित होता है तो उसकी वित्तीय और परिचालन संबंधी चुनौतियां बढ़ जाती हैं। इसी आधार पर कंपनी ने न्यायालय से अंतरिम राहत की मांग की थी। हालांकि सिंगल बेंच ने मामले के तथ्यों और आबकारी विभाग की कार्यवाही को देखते हुए कंपनी को राहत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद ही नियमानुसार कंपनी ने डिवीजन बेंच में अपील करने का निर्णय लिया ताकि प्रशासनिक आदेश पर रोक लगाई जा सके।
-लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई
इस कानूनी विवाद की जड़ में राज्य सरकार और आबकारी विभाग द्वारा कंपनी के लाइसेंस को निलंबित करने का फैसला है। विभाग ने कुछ गंभीर अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए रायसेन स्थित सोम डिस्टिलरीज के प्लांट पर यह कार्यवाही की थी। कंपनी ने इस कार्यवाही को मनमाना बताते हुए हाई कोर्ट की सिंगल बेंच में चुनौती दी थी। कंपनी के वकीलों ने दलील दी थी कि विभाग का निर्णय प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है और इससे व्यापारिक हितों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। वहीं सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए नियमों के पालन और जांच रिपोर्ट का हवाला दिया गया था। सिंगल बेंच ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद विभाग की कार्यवाही में तत्काल हस्तक्षेप करने से मना कर दिया था।
-डिवीजन बेंच में अपील के कानूनी आधार
मुख्य न्यायाधीश की डिवीजन बेंच में दायर इस अपील में कंपनी ने कई तकनीकी और कानूनी बिंदुओं को आधार बनाया है। कंपनी का तर्क है कि लाइसेंस निलंबन की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों की अनदेखी की गई है। अब डिवीजन बेंच यह तय करेगी कि क्या सिंगल बेंच का फैसला विधि सम्मत था या उसमें सुधार की आवश्यकता है। कंपनी की पूरी कोशिश है कि मुख्य न्यायाधीश की बेंच से उसे जल्द से जल्द कोई राहत मिल सके ताकि प्लांट में उत्पादन फिर से शुरू किया जा सके। आगामी सुनवाई में सरकार को भी अपना पक्ष मजबूती से रखना होगा क्योंकि यह मामला प्रदेश के बड़े राजस्व स्रोत और औद्योगिक नियमों से जुड़ा हुआ है।
