जबलपुर। जिले में शिक्षक पात्रता परीक्षा के आयोजन के प्रस्ताव ने एक बड़े विवाद का रूप ले लिया है। 3 वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ की जिला इकाई ने इस निर्णय के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए मैदानी संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है। संघ द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार शिक्षक वर्ग के अस्तित्व और उनकी कार्यक्षमता पर उठाए जा रहे सवाल किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा शिक्षकों की योग्यता को लेकर जो टिप्पणी की गई है और उसके बाद परीक्षा थोपने का जो प्रयास हो रहा है, उससे पूरे शिक्षक समुदाय में भारी असंतोष और आक्रोश व्याप्त है। राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में शिक्षक सदैव अग्रिम पंक्ति में खड़े रहते हैं। सरकारी तंत्र को सुचारू रूप से चलाने और लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूती प्रदान करने के लिए शिक्षक ही चुनाव जैसे महत्वपूर्ण और जटिल कार्यों को सफलतापूर्वक संपन्न कराते आए हैं। ऐसे में वर्तमान अनुभव और वर्षों की निष्ठापूर्ण सेवा के बाद दोबारा पात्रता परीक्षा देने का नया आदेश न केवल तर्कहीन है बल्कि यह शिक्षकों की गरिमा और संवेदनशीलता के साथ खिलवाड़ जैसा प्रतीत होता है। संघ ने स्पष्ट रूप से शासन को चेतावनी दी है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर तुरंत सकारात्मक पुनर्विचार किया जाना चाहिए। यदि इस बेतुके और अव्यवहारिक आदेश को वापस नहीं लिया गया तो आगामी दिनों में जबलपुर सहित पूरे प्रदेश के शिक्षक सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराने को मजबूर होंगे। भविष्य में होने वाले किसी भी विरोध प्रदर्शन की उग्रता और उससे उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रकार की प्रशासनिक स्थिति के लिए सीधे तौर पर शासन और प्रशासन की जिम्मेदारी होगी।
सड़क पर किया जाएगा संघर्ष
इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले और आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग करने वाले प्रमुख सदस्यों में अतुल मिश्रा, नितिन अग्रवाल, रत्नेश मिश्रा, दुर्गेश पांडेय, अभिषेक मिश्रा, प्रमोद वर्मा, राजेश गुप्ता, गगन चौबे, राकेश शर्मा, प्रभात जाट, संतोष पटेल और प्रमोद विश्वकर्मा शामिल हैं। इन सभी पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से कहा है कि शिक्षकों के आत्मसम्मान पर चोट किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कर्मचारी संघ अंतिम समय तक संघर्ष करने को तैयार है।
