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शक्ति भवन में 2.45 करोड़ की वित्तीय अनियमितता, लेखाधिकारी निलंबित कर सीधी भेजे गए, ​हड़कंप

 


जबलपुर।  मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के मुख्यालय शक्ति भवन में पदस्थ लेखाधिकारी दिग्विजय सिंह चौहान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। कंपनी के प्रबंधन संचालक के आदेश और अनुमोदन के उपरांत मुख्य महाप्रबंधक मानव संसाधन एवं प्रशासन संपदा सराफ ने इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी किए हैं। लेखाधिकारी दिग्विजय सिंह चौहान पर यह दंडात्मक कार्रवाई उनके केंद्रीय बिलिंग प्रकोष्ठ में पदस्थापना के दौरान बरती गई गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और शासकीय निर्देशों की अवहेलना के चलते की गई है। इस प्रशासनिक निर्णय की जानकारी कंपनी के सभी संबंधित क्षेत्रीय और मुख्य कार्यालयों को भेज दी गई है।

​बिना शासन की अनुमति के 2.45 करोड़ का अनधिकृत समायोजन

​विभागीय जांच में यह तथ्य उजागर हुआ है कि दिग्विजय सिंह चौहान ने मेसर्स आर.सी.एल. छिंदवाड़ा एवं मेसर्स जय प्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड छिंदवाड़ा से जुड़े प्रकरणों में भारी लापरवाही बरती। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा रिट याचिका क्रमांक 28875/2021 एवं 21697/2022 में पारित आदेशों के क्रियान्वयन के दौरान शासन के अनिवार्य अनुमोदन के बिना ही विद्युत शुल्क की कुल 2.45 करोड़ राशि का समायोजन अनाधिकृत रूप से बिजली देयकों में कर दिया गया। यह प्रक्रिया राज्य कोषीय राशि की वापसी के संबंध में शासन द्वारा जारी स्पष्ट निर्देशों के विरुद्ध थी। लेखाधिकारी ने कंपनी की अधिकार प्रत्यायोजन पुस्तिका में प्रदत्त शक्तियों का उल्लंघन कर यह कार्य किया जिससे कंपनी की छवि और राजस्व प्रबंधन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।

चौहान ​अब सीधी में देंगे सेवाएं 

​कर्तव्य निष्पादन में बरती गई इस बड़ी लापरवाही और अनुशासनहीनता के कारण दिग्विजय सिंह चौहान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनका मुख्यालय क्षेत्रीय लेखाधिकारी कार्यालय सीधी नियत किया गया है। निलंबन की अवधि में उन्हें नियमानुसार केवल जीवन निर्वाह भत्ता ही प्राप्त होगा। ये आदेश उप महाप्रबंधक जांच सुनील कुमार द्वारा जारी किया गया है। इस आदेश की प्रतिलिपि मुख्य महाप्रबंधक वाणिज्य जबलपुर, मुख्य अभियंता जबलपुर, अधीक्षण अभियंता छिंदवाड़ा और महाप्रबंधक स्थापना दावा प्रकोष्ठ जबलपुर को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई है। कंपनी प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि शासकीय कार्यों में वित्तीय नियमों की अनदेखी किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगी।

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