जबलपुर. पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर रेल मंडल के अंतर्गत आधा दर्जन स्टेशनों कई रेल कालोनियों की साफ-सफाई का काम करने वाले उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ठेकेदार पर प्रशासन ने अपनी नजर टेढ़ी कर ली है. दरअसल यूपी के इस ठेकेदार द्वारा कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं देने, पीएफ नहीं काटने सहित सफाई कार्य में गड़बड़ी का आरोप था।
बताया जाता है कि लखनऊ स्थित मेसर्स आरएन इंडस्ट्रीज ने जबलपुर रेल मंडल में चिकित्सा विभाग के अंतर्गत रेलवे अस्पताल, डिस्पेेंसरियों, आधा दर्जन से अधिक रेलवे स्टेशनों, जबलपुर स्थित रेल सौरभ कालोनी, बजरंग कालोनी सहित कई कालोनियों की साफ-सफाई का ठेका लिया था.
कार्य की शुरुआत से ही शिकायतें
बताया जाता है कि आरएन इंडस्ट्रीज ने जबलपुर रेल मंडल में काम शुरू किया और कुछ ही दिनों में उक्त ठेकेदार की शिकायतें प्रशासन को मिलना शुरू हो गई. कालोनियों, स्टेशनों, अस्पताल में ढंग से साफ-सफाई नहीं की जा रही थी. लगातार नोटिस भी प्रशासन द्वारा दिया जा रहा था, इसके बावजूद कार्य में सुधार नहीं हो रहा था.
कर्मचारियों के वेतन, पीएफ का अता-पता नहीं
बताया जाता है कि ठेके में स्पष्ट शर्तें है कि जो भी स्टाफ रहेगा, उसे समय पर निर्धारित वेतन तो दिया ही जायेगा, साथ ही उसका भविष्य निधि (पीएफ) की भी कटौती की जायेगी, किंतु पीएफ का अता-पता नहीं, वहीं समय पर कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया जा रहा था, जिससे कर्मचारियों द्वारा अचानक कामबंद हड़ताल पर चले जाते थे, जिससे रेलवे की सफाई व्यवस्था जबर्दस्त ढंग से प्रभावित हो रही थी. इन सब घटनाओं को प्रशासन ने गंभीरता से लिया.
सीएमएस ने ठेका किया टर्मिनेट, 2 साल तक काम ठेका नहीं ले सकेगी कंपनी
बताया जाता है कि जबलपुर रेल मंडल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. अशोक कुमार ने गत 21 मार्च 2026 को लखनऊ की मेसर्स आरएन इंडस्ट्रीज का ठेका टर्मिनेट करने का आदेश जारी कर दिया. साथ ही जबलपुर रेल मंडल में उक्त कंपनी 2 सालों तक काम नहीं कर सकेगी.

