khabar abhi tak

सुबह से फिर लग गईं गैस के लिए लंबी कतारें, मुसीबत बरकरार

 


जबलपुर। शहर में वर्तमान में रसोई गैस की आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। शहर के विभिन्न हिस्सों में आज भी वैसी ही स्थिति देखी गई जैसी पिछले कुछ दिनों से बनी हुई है। सुबह की पहली किरण के साथ ही गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं का तांता लगना शुरू हो जाता है। घरेलू उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर की बुकिंग कराने से लेकर उसकी डिलीवरी प्राप्त करने तक के लिए कड़े संघर्ष से गुजरना पड़ रहा है। एक तरफ आम आदमी अपने हक की गैस के लिए घंटों कतार में खड़ा रहने को विवश है वहीं दूसरी तरफ शहर के व्यावसायिक केंद्रों पर नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर मची इस अफरा तफरी ने आम जनता के बजट और समय दोनों को बुरी तरह प्रभावित किया है। बुकिंग के कई दिनों बाद भी लोगों को सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं जिससे गृहणियों को रसोई चलाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

​घरेलू गैस सिलेंडरों का होटल और स्टॉल पर अवैध उपयोग

​शहर के प्रमुख व्यावसायिक इलाकों पर नजर डाली जाए तो सदर और सिविक सेंटर चौपाटी जैसे क्षेत्रों में हालात काफी चिंताजनक हैं। यहां संचालित होने वाली चाट नाश्ते और फास्ट फूड की दुकानों पर घरेलू एलपीजी सिलेंडरों का इस्तेमाल धड़ल्ले से किया जा रहा है। कायदे से इन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए कमर्शियल गैस सिलेंडर का उपयोग अनिवार्य किया गया है लेकिन बाजार से कमर्शियल सिलेंडर लगभग नदारद हो चुके हैं। उनकी जगह छोटे ढाबों और स्ट्रीट फूड की रेहड़ियों पर 14.5 किलोग्राम वजन वाले घरेलू सिलेंडर खुलेआम उपयोग में लाए जा रहे हैं। कई स्थानों पर तो एक साथ 2 या 3 सिलेंडरों का इस्तेमाल किया जा रहा है जिससे घरेलू उपभोक्ताओं के हिस्से की गैस व्यावसायिक कार्यों में खप रही है। होटल और फास्ट फूड स्टॉल संचालक इन सिलेंडरों का भंडार कर रहे हैं जिससे बाजार में कृत्रिम कमी की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

​नियम ताक पर रखकर दुकानों में हो रही आपूर्ति

​प्रशासनिक नियमों के मुताबिक घरेलू एलपीजी सिलेंडर केवल घरों में खाना बनाने के उपयोग के लिए निर्धारित हैं। इसके बावजूद शहर के मुख्य बाजारों और चौराहों पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत नजर आती है। गैस एजेंसियों के सामने सुबह से शाम तक लाइन में लगने वाले लोगों का कहना है कि उन्हें सिलेंडर मिलने में काफी देरी हो रही है जबकि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को ये आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं। छोटे स्टॉल और दुकानों में सिलेंडरों का यह अवैध भंडार आम लोगों की मुसीबतों को दोगुना कर रहा है। यदि गैस के इस व्यावसायिक उपयोग पर लगाम नहीं लगाई गई तो आने वाले समय में आम उपभोक्ताओं की परेशानी और अधिक बढ़ सकती है। शहर के प्रमुख व्यावसायिक इलाकों में नियमित जांच की कमी के कारण यह अवैध उपयोग निरंतर जारी है। चाय पान की दुकानों और अन्य छोटे होटलों में भी घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग सबसे अधिक देखा जा रहा है जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।

Post a Comment

Previous Post Next Post
khabar abhi tak
khabar abhi tak
khabar abhi tak