जबलपुर। भारतीय रेलवे और पर्यटन निगम यानी आईआरसीटीसी ने जबलपुर समेत देश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर स्थित कैटरिंग स्टालों और बेस किचन के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधा के कारण कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की भारी कमी देखी जा रही है। इस संकट से निपटने के लिए आईआरसीटीसी ने सभी स्टेटिक कैटरिंग संचालकों को खाना पकाने के लिए गैस के बजाय इंडक्शन, माइक्रोवेव और अन्य बिजली उपकरणों का उपयोग करने के निर्देश दिए हैं। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण भारत में कमर्शियल एलपीजी की उपलब्धता पर असर पड़ा है। मार्च 2026 के इस दौर में जबलपुर सहित कई शहरों में सिलेंडरों की वेटिंग लिस्ट बढ़ गई है। रेलवे जैसे सार्वजनिक परिवहन केंद्रों पर भोजन की निरंतरता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया है। आईआरसीटीसी का लक्ष्य है कि गैस की कमी के कारण स्टेशनों पर यात्रियों के लिए भोजन की उपलब्धता प्रभावित न हो।
आपूर्ति में बाधा से पैदा हुआ संकट
वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और युद्ध के हालातों ने ऊर्जा क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया है। विशेष रूप से कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कमी से बड़े स्तर पर भोजन तैयार करने वाली इकाइयां जूझ रही हैं। जबलपुर जैसे बड़े रेलवे जंक्शन पर प्रतिदिन हजारों यात्रियों के लिए भोजन और नाश्ता तैयार किया जाता है। गैस की किल्लत की वजह से कैटरिंग सेवाओं के ठप होने का खतरा मंडरा रहा था। इसे देखते हुए रेलवे प्रशासन ने वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता बढ़ाने का फैसला किया है। गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में आई गिरावट का असर केवल रेलवे तक सीमित नहीं है, बल्कि बाजार में भी इसकी कमी महसूस की जा रही है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए मार्च 2026 में यह नई गाइडलाइन प्रभावी कर दी गई है।
बिजली उपकरणों के उपयोग पर जोर
आईआरसीटीसी द्वारा जारी किए गए निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि स्टॉल संचालकों को चाय, कॉफी और नाश्ता तैयार करने के लिए इंडक्शन कुकटॉप और माइक्रोवेव ओवन का अधिक से अधिक इस्तेमाल करना होगा। अब तक स्टेशनों पर ज्यादातर स्टॉल और बेस किचन गैस भट्ठियों पर निर्भर थे, लेकिन अब उन्हें अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव करना होगा। बिजली से चलने वाले उपकरणों के माध्यम से खाना पकाने से न केवल गैस की बचत होगी बल्कि कम समय में अधिक काम भी निपटाया जा सकेगा। इसके लिए स्टेशनों पर बिजली के बुनियादी ढांचे को भी मजबूत किया जा रहा है ताकि लोड बढ़ने पर किसी तरह की तकनीकी समस्या न आए। संचालकों को परामर्श दिया गया है कि वे आधुनिक बिजली उपकरणों को प्राथमिकता दें।
बैकअप प्लान: भोजन का स्टॉक करना होगा
आपात स्थिति से निपटने के लिए आईआरसीटीसी ने संचालकों को डिब्बाबंद और रेडी टू ईट भोजन का पर्याप्त स्टॉक रखने को कहा है। यदि बिजली आपूर्ति या अन्य कारणों से ताज़ा भोजन बनाने में कठिनाई होती है, तो यात्रियों को भूखा न रहना पड़े, इसके लिए रेडी टू ईट विकल्प एक मजबूत बैकअप साबित होंगे। इसके साथ ही गैस पर निर्भरता कम करने के लिए बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु रेलवे के बिजली विभागों से समन्वय करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसका उद्देश्य यह है कि किसी भी सूरत में कैटरिंग सेवाओं में व्यवधान न आए और यात्रियों को स्टेशन पर गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ मिलते रहें। रेडी टू ईट स्टॉक की निगरानी भी नियमित रूप से की जाएगी।
सुरक्षा और पर्यावरण के लिहाज से बेहतर कदम
इस बदलाव से यात्रियों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता पर कोई सीधा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इंडक्शन और अन्य बिजली उपकरणों का उपयोग गैस की तुलना में अधिक सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त होता है। इससे स्टेशनों पर आग लगने जैसी दुर्घटनाओं का खतरा भी कम हो जाएगा। हालांकि, भारी मात्रा में भोजन तैयार करने वाले बेस किचन के लिए यह बदलाव थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन रेडी टू ईट विकल्पों और आधुनिक बिजली उपकरणों के कारण भोजन की कमी नहीं होने दी जाएगी। प्रदूषण नियंत्रण की दृष्टि से भी बिजली का उपयोग कोयले या गैस की तुलना में अधिक अनुकूल माना जाता है, जिससे रेलवे परिसर के वातावरण में सुधार होगा।
