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केस लड़ते-लड़ते बिक गयी तीन एकड़ जमीन,राहत दी जाये

 


जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें एक ससुर ने अपनी विधवा बहू को गुजारा भत्ता देने के आदेश को चुनौती दी थी। जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि आवेदक को अपनी विधवा बहू को गुजारा भत्ता के रूप में महज 2100 रुपये देने थे। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इतनी कम राशि देने के बजाय आवेदक अनावश्यक मुकदमेबाजी कर रहे थे। बेंच ने निचली अदालत के आदेश को उचित ठहराते हुए याचिका निरस्त कर दी। यह पूरा मामला सागर जिले की देवरी तहसील के ग्राम धुलतारा निवासी मानसिंह पटेल से संबंधित है। उन्होंने रहली के एडिशनल सेशन जज द्वारा 20 नवंबर 2019 को दिए गए आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उस आदेश में सेशन जज ने मामले को पुनः विचार के लिए मजिस्ट्रेट कोर्ट वापस भेजा था। प्रकरण के अनुसार मानसिंह के बेटे बालकिशन पटेल की मृत्यु के पश्चात उनकी पत्नी श्वेता उर्फ राधा ने अपने ससुर से भरण पोषण की मांग की थी। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 28 जून 2016 को आदेश पारित कर श्वेता के लिए 1500 और उनके बेटे के लिए 600 रुपये प्रतिमाह तय किए थे। कुल 2100 रुपये की इस राशि को मानसिंह ने अपनी खराब आर्थिक स्थिति का हवाला देकर चुनौती दी थी। ससुर का दावा था कि कानूनी लड़ाई के कारण उनके पास 4 में से अब केवल 1 एकड़ जमीन ही शेष बची है इसलिए उन्हें राहत दी जाए। हालांकि उच्च न्यायालय ने उनकी इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

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