जबलपुर। संस्कारधानी के शैक्षणिक गौरव, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (रादुविवि) के गलियारों में इन दिनों सन्नाटा तो है, लेकिन यह सन्नाटा किसी बड़े तूफान के आने की आहट दे रहा है। विश्वविद्यालय का गणित एवं कंप्यूटर साइंस विभाग, जो अपनी बौद्धिक क्षमताओं के लिए जाना जाता है, आज 'अमर्यादा' के एक ऐसे भंवर में फँस गया है जिसने पूरे परिसर को झकझोर कर रख दिया है। एक महिला अतिथि शिक्षक की खामोशी जब कुलगुरु कार्यालय की दहलीज पर टूटी, तो विभाग के बंद कमरों में छिपे कई काले सच बाहर आने लगे। आरोप किसी छोटे कर्मचारी पर नहीं, बल्कि सीधे विभागाध्यक्ष की गरिमापूर्ण कुर्सी पर बैठे व्यक्ति पर हैं।
दोपहर के 3:50 बजे और वो खौफनाक मंजर: जब सरेआम तार-तार हुई मर्यादा
यह पूरा घटनाक्रम 2 मार्च की उस तपती दोपहर का है, जब पूरा शहर होलिका दहन की खुशियों की तैयारी कर रहा था। विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस विभाग में सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन दोपहर के ठीक 3:50 बजे अचानक चीख-पुकार और गालियों के शोर ने सन्नाटा चीर दिया। वर्ष 2019 से विभाग की नींव मजबूत कर रही एक महिला अतिथि शिक्षक के लिए वह दिन किसी बुरे सपने में बदल गया। शिक्षिका ने अपनी लिखित शिकायत में उस खौफनाक पल का जिक्र करते हुए बताया है कि कैसे विभागाध्यक्ष ने अचानक अपना आपा खो दिया और पूरे स्टाफ के सामने उनके आत्मसम्मान को निशाना बनाया।
विवाद सिर्फ तीखी बयानबाजी तक सीमित रहता तो शायद उसे अनुशासन का नाम दे दिया जाता, लेकिन आरोप इससे कहीं ज्यादा संगीन हैं। पीड़िता ने कांपते हाथों से अपनी शिकायत में लिखा है कि "विभागाध्यक्ष ने न केवल उनके खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का प्रयोग किया, बल्कि आवेश में आकर सरेआम उनका हाथ पकड़ने का प्रयास भी किया।" इस व्यवहार से वह महिला शिक्षिका गहरे मानसिक आघात में है। उनका कहना है कि विभाग के भीतर जिस सुरक्षा का अहसास एक शिक्षक को होना चाहिए, वह उस दिन पूरी तरह खत्म हो गया। इस घटना के बाद से ही विश्वविद्यालय के अन्य महिला स्टाफ में भी एक अनजाना डर व्याप्त है।
वायरल ऑडियो की 'गाली' और सीसीटीवी का 'पहरा': अब इंसाफ की बारी
इस मामले ने उस वक्त और तूल पकड़ लिया जब सोशल मीडिया पर एक विवादित ऑडियो क्लिप तेजी से वायरल होने लगी। दावा किया जा रहा है कि इस ऑडियो में विभागाध्यक्ष की आवाज है, जो न केवल गालियों की बौछार कर रहे हैं, बल्कि अहंकार में डूबे स्वर में कुलसचिव को भी फोन लगाने की चुनौती दे रहे हैं। यह ऑडियो अब इस पूरे केस का सबसे बड़ा साक्ष्य बनकर उभरा है। हालांकि, सच्चाई की पूरी तस्वीर अभी भी विभाग के उन सीसीटीवी कैमरों में कैद है, जो उस दोपहर की हर गतिविधि के मूक गवाह बने थे।
पीड़ित महिला शिक्षिका ने प्रशासन के सामने एक बड़ी और स्पष्ट मांग रखी है। उन्होंने कुलगुरु कार्यालय को दिए पत्र में आग्रह किया है कि "2 मार्च की सीसीटीवी फुटेज को तत्काल प्रभाव से सुरक्षित किया जाए और उसकी फॉरेंसिक जांच कराई जाए।" उनका मानना है कि यदि प्रशासन निष्पक्षता से इन कैमरों की फुटेज देख ले, तो विभागाध्यक्ष का असली चेहरा सबके सामने आ जाएगा। वहीं, दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी है। होली के अवकाश के बाद एक्शन मोड में आए कुलसचिव प्रो. सुरेन्द्र सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि हमें इस गंभीर मामले की लिखित शिकायत प्राप्त हुई है। मामला महिला सुरक्षा और विभागीय मर्यादा से जुड़ा है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी। एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की जा रही है, जो ऑडियो और वीडियो साक्ष्यों का मिलान करेगी। जांच के दौरान जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर सेवा नियमों के तहत कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
