जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने ऑर्डिनेंस फैक्टरीज में चार्जमैन के तकनीकी और गैर तकनीकी पदों के लिए आयोजित लिमिटेड डिपार्टमेंटल कॉम्पटेटिव एग्जाम को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया है। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने इस मामले में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण जबलपुर के पूर्व में दिए गए आदेश को बरकरार रखा है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि चयन के लिए आयोजित परीक्षा की पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हुई थी। जबलपुर निवासी मुकेश कुमार मिश्रा और अन्य अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि परीक्षा के दौरान वॉट्सएप पर प्रसारित एक कथित कोडेड उत्तर कुंजी के माध्यम से प्रश्नपत्र लीक किया गया था। याचिकाओं में इस आधार पर संपूर्ण परीक्षा को निरस्त करने की मांग की गई थी।
भ्रामक संदेशों और साक्ष्यों का अभाव
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध तथ्यों का सूक्ष्मता से विश्लेषण किया। कोर्ट ने पाया कि जिस विवादित दस्तावेज को आधार बनाकर पेपर लीक का दावा किया जा रहा था वह परीक्षा संपन्न होने के लगभग 20 दिन बाद सोशल मीडिया पर आया था। यह संदेश विभाग द्वारा आधिकारिक उत्तर कुंजी जारी किए जाने के बाद वॉट्सएप पर प्रसारित हुआ था। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि उस तथाकथित कोडेड दस्तावेज में किसी विषय या प्रश्नपत्र सेट को डिकोड करने की कोई स्पष्ट पद्धति नहीं बताई गई थी जिससे उसकी विश्वसनीयता प्रमाणित नहीं होती। ऑर्डिनेंस फैक्टरीज द्वारा इस प्रकरण की जांच के लिए गठित विशेष समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि परीक्षा में किसी भी प्रकार की अनियमितता या गोपनीयता भंग होने के प्रमाण नहीं मिले हैं।
भर्ती प्रक्रिया और पदों का विवरण
यह विभागीय भर्ती परीक्षा 26 फरवरी 2023 से 3 मार्च 2023 तक आयोजित की गई थी। इसके माध्यम से देश की 42 विभिन्न इकाइयों और कारखानों में चार्जमैन के कुल 998 रिक्त पदों को भरा जाना था। इन रिक्तियों में व्हीकल फैक्टरी जबलपुर के लिए कुल 32 पद अधिसूचित किए गए थे। इन पदों के लिए याचिकाकर्ताओं सहित कुल 741 उम्मीदवारों ने परीक्षा में भाग लिया था। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ असफल अभ्यर्थियों द्वारा चयन प्रक्रिया को संदेह के घेरे में लाने के लिए परीक्षा के बाद इस प्रकार के संदेश तैयार कर प्रसारित किए गए। अदालत ने साफ किया कि केवल अनुमान या सोशल मीडिया के संदेशों के आधार पर किसी भी बड़ी भर्ती परीक्षा को तब तक रद्द नहीं किया जा सकता जब तक कि धांधली के ठोस और प्रमाणिक साक्ष्य मौजूद न हों।
