महाकोशल महाविद्यालय में सांस्कृतिक गौरव का उत्सव: लोकरंग फाग के संग,झूम उठा वातावरण
जबलपुर। पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस महाकोशल कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में लोकरंग फाग के संग कार्यक्रम का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस सांस्कृतिक उत्सव के माध्यम से बुंदेली लोक संस्कृति की जीवंत छटा बिखेरी गई। कार्यक्रम की शुरुआत में हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण शुक्ल और महाविद्यालय के प्राचार्य अल्केश चतुर्वेदी ने दमोह जिले से आई विशेष फाग मंडली का आत्मीय स्वागत किया। डॉ. अरुण शुक्ल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए फाग के सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि फाग हमारी समृद्ध लोक संस्कृति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अभिन्न हिस्सा है, जिससे वर्तमान पीढ़ी के छात्र-छात्राओं का भलीभांति परिचित होना आवश्यक है। प्राचार्य श्री चतुर्वेदी ने फाग को एक विशिष्ट गायन विधा के रूप में परिभाषित किया जो हमारे आंचलिक लोकरंग की वास्तविक पहचान मानी जाती है।
लोक संस्कृति का संरक्षण और शैक्षणिक महत्व
महाविद्यालय परिसर के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान शैक्षणिक वातावरण पूरी तरह लोक विधाओं के रंग में रंगा नजर आया। बड़ी संख्या में उपस्थित शिक्षकों और विद्यार्थियों ने इन पारंपरिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया। प्राचार्य ने अपने वक्तव्य में इस बात पर बल दिया कि ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत के प्रति गौरव का भाव जागृत होता है। डॉ. अरुण शुक्ल ने लोक कलाओं को समाज का दर्पण बताते हुए कहा कि इन विधाओं को जीवित रखना शिक्षण संस्थानों का नैतिक दायित्व है। इस अवसर पर महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्राध्यापक भी मौजूद रहे, जिन्होंने लोक गायन की बारीकियों को समझा और सराहा। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किताबी ज्ञान के साथ-साथ युवाओं को अपनी मिट्टी की कला और संस्कृति से जोड़ना था, जिसमें महाविद्यालय प्रबंधन सफल रहा।
- टोली ने बंधा समां, सब झूम उठे
आयोजन का मुख्य आकर्षण दमोह के बिसमाखेड़ी ग्राम से आई 20 सदस्यों वाली फाग टोली रही। इस मंडली ने अपनी एक से बढ़कर एक फाग प्रस्तुतियों से पूरे सभागार में समां बांध दिया। प्रस्तुति के दौरान जब कलाकारों ने 'चले आते हैं कुंवर कर सोहे धनुष और बान तथा जयद्रथ ऐसी कह रहा सुन बालक नादान.. जैसी पारंपरिक फाग की पंक्तियों का गायन किया, तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। फाग के साथ टोली के सदस्यों द्वारा किए गए आकर्षक नृत्य ने दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। कलाकारों की ऊर्जा और लयबद्धता को देखकर वहां मौजूद छात्र भी झूमने पर मजबूर हो गए। कार्यक्रम का सफल और प्रभावी मंच संचालन डॉक्टर बलिराम ने किया। उन्होंने न केवल बेहतरीन संचालन की जिम्मेदारी निभाई, बल्कि फाग टोली के साथ स्वर से स्वर मिलाकर अपनी गायन प्रतिभा का भी परिचय दिया। फाग मंडली के नृत्य और संगीत के समन्वय ने इस आयोजन को यादगार बना दिया।
