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होटल गुलजार और मेथोडिस्ट चर्च की संपत्ति कुर्क, खरीद-बिक्री पर रोक से हड़कंप

जबलपुरराजस्व विभाग ने भू-राजस्व और डायवर्सन टैक्स की वसूली के लिए सख्त रुख अपनाते हुए शहर के दो बड़े संस्थानों पर कुर्की की कार्यवाही की है। शासन के निर्देशानुसार जिले में बकाया राशि वसूलने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में गोरखपुर क्षेत्र स्थित होटल गुलजार और हवाबाग स्थित मेथोडिस्ट चर्च की संपत्तियों को कुर्क कर लिया गया है। प्रशासन ने इन कुर्क संपत्तियों के किसी भी प्रकार के क्रय-विक्रय या अनुबंध करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।

​बड़े बकायादारों पर प्रशासन की पैनी नजर


अपर कलेक्टर अभिषेक गहलोत ने पिछले दिनों राजस्व वसूली की समीक्षा बैठक आयोजित की थी। इस बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जिन बड़े बकायादारों ने मांग नोटिस जारी होने और निर्धारित समयावधि बीत जाने के बाद भी भू-राजस्व जमा नहीं किया है, उन पर नियमानुसार कठोर कार्यवाही की जाए। इन निर्देशों के पालन में अनुविभागीय राजस्व अधिकारी गोरखपुर अनुराग सिंह ने टीम के साथ मिलकर कुर्की की कार्यवाही को अंजाम दिया है। विभाग ने उन सभी संपत्तियों को चिन्हित किया है जिनसे लंबे समय से बकाया राशि प्राप्त नहीं हुई है और उन पर कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।

​होटल गुलजार के संचालकों को कुर्की का वारंट

​तहसील गोरखपुर के अंतर्गत आने वाले होटल गुलजार के संचालक संजय भाटिया और गुलजारी लाल भाटिया द्वारा व्यावसायिक उपयोग की जा रही भूमि पर डायवर्सन की 8.50 लाख रुपये की राशि बकाया है। राजस्व विभाग द्वारा पूर्व में राशि जमा करने के लिए मांग पत्र जारी किया गया था, लेकिन भुगतान न होने की स्थिति में अचल संपत्ति कुर्की का वारंट जारी किया गया। अब इस संपत्ति पर किसी भी प्रकार का संव्यवहार जैसे क्रय-विक्रय या अनुबंध करना प्रतिबंधित रहेगा। यदि संचालक जल्द ही बकाया राशि जमा नहीं करते हैं, तो राजस्व वसूली के लिए होटल की नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

​मेथोडिस्ट चर्च पर 15 लाख रुपये का राजस्व शेष

​राजस्व वसूली की इसी श्रृंखला में बुधवार को हवाबाग स्थित मेथोडिस्ट चर्च की संपत्ति पर भी कार्यवाही की गई। चर्च प्रबंधन द्वारा डायवर्सन की 15 लाख रुपये की बकाया राशि जमा नहीं करने के कारण उनकी संपत्ति कुर्क की गई है। अनुविभागीय राजस्व अधिकारी के अनुसार यदि बकाया राशि का तत्काल भुगतान नहीं होता है, तो संस्थान की चल-अचल संपत्ति की नीलामी कर शासन के राजस्व की भरपाई की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शासकीय राशि की वसूली के लिए आने वाले दिनों में अन्य बड़े डिफाल्टरों पर भी इसी तरह की सख्त कार्यवाही जारी रहेगी।

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