जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने सोम डिस्टिलरीज की याचिका पर संज्ञान लेते हुए वाणिज्यिक कर विभाग के प्रमुख सचिव और आबकारी आयुक्त को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग से स्पष्टीकरण मांगा है कि लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई किन आधारों पर की गई है।
कैसे पीछे हटे दो न्यायाधीश
यह कानूनी प्रक्रिया काफी उतार-चढ़ाव भरी रही क्योंकि जस्टिस विवेक अग्रवाल से पहले दो अन्य न्यायाधीशों ने इस प्रकरण को सुनने से इनकार कर दिया था। जस्टिस विशाल मिश्रा और जस्टिस संदीप एन भट्ट की एकल पीठों द्वारा सुनवाई से पीछे हटने के बाद मामला मुख्य न्यायाधीश के समक्ष पहुंचा था। मुख्य न्यायाधीश के हस्तक्षेप और विशेष आदेश के बाद ही इस याचिका को जस्टिस विवेक अग्रवाल की अदालत में नियत किया गया, जहां गुरुवार को प्राथमिक बहस के बाद नोटिस जारी करने का निर्णय लिया गया।
आबकारी आयुक्त के आदेश की चुनौती
विवाद की मुख्य वजह रायसेन जिले में स्थित सोम डिस्टिलरीज एंड ब्रेवरीज लिमिटेड और मेसर्स सोम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड के लाइसेंसों का निलंबन है। तत्कालीन आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल ने इंदौर की देपालपुर कोर्ट द्वारा संचालकों और कर्मचारियों के विरुद्ध दिए गए एक फैसले को आधार बनाकर यह कार्रवाई की थी। सरकारी पक्ष का तर्क है कि हालांकि उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने सजा के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है, लेकिन दोषसिद्धि अभी भी प्रभावी है। इसी तकनीकी आधार पर आबकारी विभाग ने करीब बीस दिन पहले कंपनी के सभी लाइसेंस सस्पेंड करने का कदम उठाया था, जिसे शराब कंपनी ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। कंपनी का पक्ष है कि जब ऊपरी अदालत ने सजा पर रोक लगा दी है, तो इस तरह की दंडात्मक कार्रवाई अनुचित है। अब इस कानूनी पेच पर विभाग को अपना विस्तृत पक्ष कोर्ट के सामने रखना होगा।
