जबलपुर। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की ग्रंथपाल भर्ती परीक्षा को लेकर चल रहा लंबा इंतजार अब एक बेहद रोचक और निर्णायक मोड़ पर आ गया है। महीनों से अदालती कार्यवाही और तकनीकी पेचों में उलझी इस परीक्षा के परिणाम को लेकर अभ्यर्थियों के बीच जो सस्पेंस बना हुआ था, उसे हाईकोर्ट के हालिया आदेश ने एक नई दिशा दी है। जस्टिस एमएस भट्टी की एकलपीठ ने भर्ती प्रक्रिया पर लगी रोक को हटाते हुए आयोग को रिजल्ट जारी करने की अनुमति तो दे दी है, लेकिन इस फैसले के साथ एक ऐसी शर्त जोड़ दी गई है जिसने चयन की अंतिम सूची को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है।
सीलबंद लिफाफे में कैद अभ्यर्थियों की किस्मत
न्यायालय ने पीएससी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह उन याचिकाकर्ताओं का परिणाम सार्वजनिक न करे, जिन्होंने भर्ती के नियमों को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा है कि याचिकाकर्ताओं का परिणाम सीलबंद लिफाफे में पेश किया जाए। इसका सीधा अर्थ यह है कि जहां एक ओर सामान्य अभ्यर्थियों के लिए खुशियां आने वाली हैं, वहीं विवाद के केंद्र में रहे उम्मीदवारों का भाग्य अभी भी बंद लिफाफे में ही कैद रहेगा। आयोग की ओर से पक्ष रखते हुए अधिवक्ता आदित्य पचौरी ने दलील दी कि परीक्षा काफी समय पहले संपन्न हो चुकी है और रोक के कारण अन्य योग्य उम्मीदवारों का भविष्य अधर में लटका है। इस तर्क को स्वीकार करते हुए अदालत ने शेष पदों के लिए रास्ता साफ कर दिया है।
शैक्षणिक योग्यता का विवाद,17 मार्च की चुनौती
इस पूरे कानूनी संग्राम की जड़ शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी अर्हता का वह विवाद है, जिसे प्रीति उमरे और वेंकट राव सहित अन्य अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इन अभ्यर्थियों का दावा था कि लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने के बावजूद उन्हें साक्षात्कार की प्रक्रिया से अनुचित तरीके से बाहर रखा गया। हालांकि, 17 जनवरी को कोर्ट ने इन्हें अंतरिम राहत देते हुए साक्षात्कार में शामिल होने का मौका दिया था, लेकिन अंतिम परिणाम पर पाबंदी लगा दी थी। अब सबकी नजरें 17 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि लिफाफे में बंद इन अभ्यर्थियों की किस्मत खुलेगी या कानूनी दांव-पेच उनकी मेहनत पर भारी पड़ेंगे।
