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कृषि विकास की नई इबारत लिखेंगी महिलाएं: महाकोशल कॉलेज में जुटे प्रदेश के नामचीन विशेषज्ञ



जबलपुर।  प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस महाकोशल स्वशासी अग्रणी महाविद्यालय में कृषि जगत की वर्तमान चुनौतियों और उनमें महिलाओं की भागीदारी को लेकर एक उच्च स्तरीय विमर्श आयोजित हुआ। महाविद्यालय के कृषि विभाग तथा आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में सतत कृषि विकास में महिलाओं का सशक्तिकरण विषय पर 1 दिवसीय सम्मेलन की मेजबानी की गई। यह पूरा आयोजन प्राचार्य प्रो. अलकेश चतुर्वेदी के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में महिलाओं की निर्णायक भूमिका को पहचान दिलाना और उन्हें खेती की आधुनिक पद्धतियों एवं प्रबंधन कौशल से जोड़ना रहा।

अतिथियों ने बताया महिला शक्ति का सामर्थ्य


सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में जबलपुर संभाग के अतिरिक्त संचालक प्रो. पंजाब राव चंदेलकर ने शिरकत की। उन्होंने वर्तमान परिदृश्य में महिला सशक्तिकरण के विभिन्न आयामों पर चर्चा करते हुए कृषि को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया। विशिष्ट अतिथि के रूप में शासकीय विज्ञान महाविद्यालय जबलपुर की प्राचार्य डॉ. सुनीता शर्मा ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। मुख्य वक्ता के तौर पर उपस्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. आदित्य मिश्रा ने अपने विस्तृत संबोधन में कृषि क्षेत्र में महिलाओं के श्रम और उनके योगदान की वैज्ञानिक विवेचना की। उन्होंने बताया कि किस प्रकार महिलाएं पशुपालन और उन्नत खेती के माध्यम से ग्रामीण भारत की आर्थिक तस्वीर बदल रही हैं। सतत विकास के लक्ष्यों को समय सीमा में हासिल करने के लिए डॉ. मिश्रा ने महिलाओं को तकनीकी रूप से और अधिक सक्षम बनाने तथा उन्हें आधुनिक उपकरणों के प्रति जागरूक करने पर विशेष जोर दिया।

कृषि नवाचार और चुनौतियों पर विस्तृत विमर्श

​सम्मेलन के अगले चरण में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान विभाग की डॉ. अपर्णा अवस्थी ने अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने कृषि के विभिन्न तकनीकी पक्षों को साझा करते हुए बताया कि महिलाएं किस प्रकार सीमित संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कर सकती हैं। डॉ. अवस्थी ने कहा कि कृषि क्षेत्र में वास्तविक नवाचार लाने के लिए महिलाओं की भागीदारी को केवल शारीरिक श्रम तक सीमित न रखकर उन्हें योजना निर्माण और निर्णय लेने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल करना समय की मांग है। पूरे कार्यक्रम का व्यवस्थित संचालन कृषि विभागाध्यक्ष डॉ. कविता चहल द्वारा किया गया। उन्होंने विभाग की शैक्षणिक गतिविधियों और इस सम्मेलन की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए सभी अतिथियों का परिचय कराया। इस 1 दिवसीय आयोजन में महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्राध्यापकों और कृषि संकाय के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। विषय विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए उन्हें कृषि क्षेत्र में करियर की नई संभावनाओं और स्वरोजगार के अवसरों के प्रति मार्गदर्शन प्रदान किया। अंत में महाविद्यालय के विकास में इस प्रकार के बौद्धिक आयोजनों की महत्ता पर चर्चा की गई।

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