जबलपुर। जिले में अपना आशियाना बनाने या निवेश के लिए जमीन खरीदने की योजना बना रहे लोगों को अब अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी होगी। जिला प्रशासन ने नई कलेक्टर गाइडलाइन के तहत संपत्तियों के दामों में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया है। इस संबंध में गत दिवस कलेक्ट्रेट कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में कलेक्टर राघवेंद्र सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत, जबलपुर विकास प्राधिकरण के दीपक वैध सहित टीएनसीपी, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन का मुख्य फोकस उन क्षेत्रों पर है जहां पिछले एक साल के दौरान सबसे ज्यादा रजिस्ट्री हुई हैं और जहां शहरी विस्तार तेजी से हो रहा है। बैठक के दौरान कलेक्टर ने पंजीयन कार्यालय द्वारा तैयार की गई सूची और वहां की बदलती तस्वीर से जुड़े तथ्यों पर गहन मंथन किया।
नई गाइडलाइन में राजस्व वृद्धि और शहरी विस्तार पर ध्यान
पंजीयन कार्यालय द्वारा तैयार की गई नई गाइडलाइन में शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों की जमीनों के दाम बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। विशेष रूप से बायपास और रिंग रोड के किनारे स्थित क्षेत्रों की कीमतों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। जानकारी के अनुसार, जिले की कुल 2705 लोकेशनों में से 1366 लोकेशनों पर दाम बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। इन क्षेत्रों में औसत मूल्य वृद्धि 15.37 प्रतिशत रहने की संभावना है। सर्वे के दौरान यह पाया गया कि रिंग रोड से लगे कई गांवों में वर्तमान गाइडलाइन दरें वास्तविक बाजार मूल्य से काफी कम हैं। इसे संतुलित करने के लिए नगर निगम के वार्ड 08, 15, 16, 21, 67, 72, 73, 74 और 75 में कीमतों को बढ़ाने पर सहमति बनी है। इसके अतिरिक्त मास्टर प्लान में शामिल 62 गांवों के विकास और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत हो रहे विस्तार को देखते हुए वहां जमीनों की मांग और कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
विभिन्न श्रेणियों में मूल्य वृद्धि का प्रस्ताव
प्रस्तावित नई गाइडलाइन को 1 अप्रैल 2026 से लागू करने की तैयारी है। इसके तहत विभिन्न श्रेणियों की भूमि के लिए अलग-अलग प्रतिशत निर्धारित किए गए हैं। आवासीय भूखंडों की कीमतों में 25 प्रतिशत तक की वृद्धि का प्रस्ताव है, जबकि व्यावसायिक और बहुमंजिला भूखंडों के दामों में 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की जा सकती है। सबसे अधिक प्रभाव कृषि भूमि पर पड़ेगा, जहां सिंचित और असिंचित दोनों श्रेणियों में 80 से 99 प्रतिशत तक की भारी वृद्धि प्रस्तावित है। नई दरें निर्धारित करते समय पिछले एक वर्ष में स्वीकृत कॉलोनियों, भूमि व्यपवर्तन के मामलों, बड़े निर्माण कार्यों और सड़क एवं सीवरेज जैसी सुविधाओं के विस्तार को मुख्य आधार बनाया गया है। जिला प्रशासन का मानना है कि वास्तविक बाजार मूल्य और सरकारी गाइडलाइन दरों के बीच के बड़े अंतर को कम करने से राजस्व में बढ़ोतरी होगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विकास की गति और बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता के आधार पर ही इन कीमतों का अंतिम निर्धारण किया गया है।
