जबलपुर। धर्म, वर्ग और राजनीतिक भेदभाव की सीमाओं को लांघकर गुंजन कला सदन द्वारा आयोजित 'रसरंग महोत्सव' ने एक बार फिर अपनी विशिष्टता सिद्ध की। शहीद स्मारक भवन में आयोजित इस गरिमामयी समारोह में लोक संस्कृति, उल्लास और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने साझा विचार व्यक्त करते हुए कहा कि गुंजन कला सदन का यह आयोजन अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने और समाज के हर वर्ग को साथ लाने का एक सशक्त माध्यम है।
परंपरा और उल्लास का अनूठा संगम
महोत्सव का आगाज़ बेहद पारंपरिक और उत्साहजनक रहा। शहीद स्मारक भवन के मुख्य द्वार पर अतिथियों का स्वागत किसी उत्सव की तरह किया गया। सुरेश सराफ, लायन नरेंद्र जैन, श्याम चौदहा और हिमांशु तिवारी सहित संस्था के अन्य सदस्यों ने दुलदुल घोड़ी नृत्य के बीच आगंतुकों को माला और साफा पहनाकर 'दूल्हा वेश' में सजाया। इस दौरान आमंत्रित अतिथियों और दर्शकों ने बग्घी एवं घोड़ों पर सवारी का भरपूर आनंद लिया। पूरा वातावरण ढोल-नगाड़ों की थाप और लोक गीतों की गूंज से सराबोर हो गया, जिसने दर्शकों को कार्यक्रम की शुरुआत में ही मंत्रमुग्ध कर दिया।
लोक कला और किन्नर नृत्य का जादू
प्रेक्षागृह के भीतर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला ने दर्शकों को बांधे रखा। लोकगायक मिठाईलाल चक्रवर्ती के सुरीले गीतों और नृत्य निर्देशक मोती शिवहरे के कुशल निर्देशन में कलाकारों ने विभिन्न क्षेत्रों के होली नृत्यों की मनोहारी प्रस्तुतियां दीं। इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण किन्नर नायक एवं पूर्व पार्षद हीरा बाई के मार्गदर्शन में किन्नरों की टोली द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक नृत्य रहा। विशेष आकर्षक परिधानों में सजे किन्नर कलाकारों की कलात्मक प्रस्तुति ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उपस्थित जनसमुदाय ने करतल ध्वनि से इस ऐतिहासिक पहल का स्वागत किया।
सेवा और सौहार्द का सम्मान
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ ही यह मंच सम्मान और कृतज्ञता का भी साक्षी बना। संस्था के संरक्षक अजय विश्नोई एवं अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर समाज के प्रति समर्पित सेवाओं के लिए किन्नर नायक हीरा बाई को 'अभिनंदन पत्र' देकर सम्मानित किया गया। साथ ही संस्था के वरिष्ठ सदस्यों गौरीशंकर केसरवानी, डीसी जैन, रुद्रदत्त दुबे 'करुण' और अन्य विभूतियों का भी सम्मान किया गया। नगर गुंजन और युवा गुंजन के सहयोगियों का परिचय क्रमशः संजय जैन कीपी और हिमांशु तिवारी ने दिया। महिला प्रकोष्ठ की ओर से इंदिरा पाठक तिवारी एवं उनकी टीम ने महिला अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन प्रतुल श्रीवास्तव एवं राजेश पाठक 'प्रवीण' ने किया। अंत में आभार प्रदर्शन के साथ इस यादगार शाम का समापन हुआ।




