बताया जाता है कि जबलपुर के आसपास स्थित टोल प्लाजा पर कार चालकों को 5 से 10 रुपए तक अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है। वहीं फास्ट टैग के जरिए मिलने वाले करीब 3 हजार रुपए के एनुअल पास में भी लगभग 75 रुपए तक की बढ़ोतरी की संभावना है। गौरतलब है कि टोल टैक्स की दरें होलसेल प्राइस इंडेक्स के आधार पर तय की जाती हैं। हर साल के अंत में इंडेक्स का मूल्यांकन कर सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय नए रेट जारी करता है। टोल की राशि सड़क की लंबाई और उस पर बने इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे फ्लाईओवर, अंडरपास टनल आदि के आधार पर भी तय होती है। जहां ज्यादा सुविधाएं होती हैं, वहां टोल भी अधिक लगता है। टोल बढऩे को लेकर वाहन चालकों का कहना है कि टोल बढ़ाना समझ में आता है, लेकिन सड़कों का मेंटेनेंस भी उतना ही जरूरी है। भोपाल रोड की हालत खराब बताई जा रही है। इसी तरह जबलपुर से दमोह, सागर अभी हाईवे घोषित है, लेकिन बना नहीं हैए जिसके चलते यह अभी स्टेट हाइवे की श्रेणी में आता है। इसी तरह से जबलपुर से पाटन, तेंदुखेड़ा जबलपुर से गोटेगांव में स्टेट हाईवे को टोल है।
एक अप्रैल से सालाना पास के लिए 3075 रुपए देने होंगे-
एनएचएआई ने कार के लिए बनाए जाने वाले सालाना पास की कीमतों में 75 रुपए की बढ़ोतरी की। ये बढ़ोतरी भी 1 अप्रैल से लागू होगी। अभी सालाना पास 3 हजार रुपए में बनता है, जिसमें 200 टोल बूथ क्रॉस करने की लिमिट होती है। 1 अप्रैल से बनने वाले सालाना पास के लिए अब 3075 रुपए देने पड़ेंगे।