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हेमलता श्रीवास्तव केस:करोड़ों का 'दानपत्र' या महज़ रद्दी का टुकड़ा... एसडीएम की एक कलम ने पलट दिया धोखे का खेल !

 


आरोप है कि बेशकीमती संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने के लिए फर्जी दस्तावेजों और प्रभाव का इस्तेमाल किया गया था

जबलपुर। शहर के हृदय स्थल राइट टाउन स्थित स्वर्गीय हेमलता श्रीवास्तव की 25,045 वर्गफुट की बेशकीमती आवासीय भूमि को लेकर जारी लंबा कानूनी विवाद अब समाप्त हो गया है। अधारताल एसडीएम पंकज मिश्रा की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सुमित जैन और प्राची जैन के पक्ष में किए गए करोड़ों रुपये के दानपत्र को पूरी तरह से शून्य घोषित कर दिया है। 6 मार्च 2026 को पारित इस आदेश के साथ ही राजस्व रिकॉर्ड के कॉलम नंबर 7 में आवश्यक संशोधन कर अब इस भूमि पर नगर निगम जबलपुर का नाम दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। इस फैसले के बाद भू-माफियाओं और संपत्ति हड़पने की मंशा रखने वाले सिंडिकेट को बड़ा झटका लगा है।

साजिश का कैसे हुआ पर्दाफाश

​इस पूरे प्रकरण में जबलपुर के एक कद्दावर नेता के भाई की संलिप्तता और एक संगठित साजिश की बात सामने आई थी। आरोप है कि बेशकीमती संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने के लिए फर्जी दस्तावेजों और प्रभाव का इस्तेमाल किया गया था। स्वर्गीय हेमलता श्रीवास्तव की मृत्यु से पूर्व उनके द्वारा दिए गए बयानों को शुरुआत में मदन महल पुलिस द्वारा कथित तौर पर दबाने का प्रयास किया गया था। हालांकि, आईएमए की शिकायत और मीडिया में मामला उछलने के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम पंकज मिश्रा को तत्काल जांच और बयान दर्ज करने के निर्देश दिए थे।मृत्यु पूर्व दिए गए बयानों में हेमलता श्रीवास्तव ने जैन दंपत्ति द्वारा संपत्ति हड़पने के प्रयासों की पुष्टि की थी। इसके बाद जब मामले में एफआईआर दर्ज हुई, तो सुमित और प्राची जैन फरार हो गए। कोर्ट द्वारा बार-बार समन जारी किए जाने के बावजूद आरोपी पक्ष बयान देने के लिए अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। उनकी अनुपस्थिति और साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने दानपत्र को अवैध मानते हुए खारिज कर दिया। प्रशासन ने इस मामले में पहले ही सतर्कता बरतते हुए कैविएट दाखिल कर दी थी, ताकि भविष्य में कोई तकनीकी अड़चन न आए।

धार्मिक संस्था का दावा,अब हुआ फेल

​इस विवादित संपत्ति से जुड़ा एक अन्य पहलू एक धार्मिक संस्था को मिली वसीयत का भी है। एसडीएम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उक्त संस्था को अपनी वसीयत की सत्यता अब सक्षम न्यायालय में सिद्ध करनी होगी। कानूनी जानकारों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों और नगर निगम के पक्ष में आए आदेश के बाद अब किसी अन्य पक्ष के लिए दावा सिद्ध करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण होगा। फिलहाल जमीन का भौतिक और कागजी अधिपत्य नगर निगम के पास सुरक्षित हो गया है, जिससे क्षेत्र की सबसे महंगी जमीनों में शुमार इस भूखंड पर चल रहे गड़बड़झाले का पटाक्षेप हो गया है।

नगर निगम का नाम दर्ज होगा:एसडीएम

​अधारताल एसडीएम पंकज मिश्रा ने आदेश की पुष्टि करते हुए कहा कि स्वर्गीय हेमलता श्रीवास्तव की संपत्ति को धोखे से अपने नाम कराने के मामले में सुमित और प्राची जैन के पक्ष में तैयार दानपत्र को निरस्त कर दिया गया है। राजस्व प्रविष्टियों में सुधार कर नगर निगम का नाम दर्ज करने के आदेश जारी किए जा चुके हैं।

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