जबलपुर। मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने बिजली बुनियादी ढांचे के रखरखाव में आत्मनिर्भरता का परिचय देते हुए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने सब-स्टेशनों के मेंटेनेंस कार्यों को सुगम बनाने के लिए 36 फीट की ऊंचाई तक पहुंचने में सक्षम मैन लिफ्टर का निर्माण किया है। खास बात यह है कि इस मशीन का पूरा डिजाइन और निर्माण बाहरी एजेंसी की मदद के बिना पूरी तरह इन-हाउस प्रक्रिया के माध्यम से संपन्न किया गया है।
स्क्रैप से हुआ निर्माण, हुई बचत
इस मैन लिफ्टर के निर्माण में आर्थिक बचत और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसे तैयार करने के लिए सब-स्टेशनों में रखे पुराने स्क्रैप मटेरियल का उपयोग किया गया और बहुत कम आवश्यक सामग्री बाहर से खरीदी गई। व्यावसायिक बाजार में इस तरह के लिफ्टर की शुरुआती कीमत 2.50 लाख रुपये के आसपास होती है, जबकि एमपी ट्रांसको ने इसे महज 39000 रुपये की लागत में तैयार कर लिया है। यह नवाचार न केवल वित्तीय दृष्टि से लाभकारी है, बल्कि विभागीय दक्षता का भी प्रमाण है।
तकनीकी टीम का कमाल
इस परियोजना को सफलतापूर्वक अमलीजामा पहनाने में सागर के अधीक्षण अभियंता एम वाय मंसूरी के मार्गदर्शन में टीकमगढ़ के कार्यपालन अभियंता आर पी कान्यकुब्ज और सहायक अभियंता जी पी राय की भूमिका महत्वपूर्ण रही। इस लिफ्टर की सहायता से अब ऊंचे स्ट्रक्चर, बस बार और इंसुलेटर तक तकनीकी कर्मचारी बिना किसी अतिरिक्त रिस्क के पहुंच सकेंगे। इससे पारंपरिक सीढ़ी और मचान पर निर्भरता खत्म होगी और रखरखाव के दौरान लगने वाले समय में कमी आएगी।
सुरक्षा मानकों में बड़ा सुधार
विद्युत उपकेंद्रों में ऊंचाई पर होने वाले कार्यों में सुरक्षा हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। स्थानीय स्तर पर निर्मित यह मैन लिफ्टर तकनीकी अमले को एक स्थिर और सुरक्षित मंच प्रदान करेगा। इससे दुर्घटनाओं की संभावना न्यूनतम होगी और मरम्मत के दौरान होने वाले शटडाउन का समय भी कम किया जा सकेगा। यह पहल दर्शाती है कि सीमित संसाधनों के साथ भी तकनीकी नवाचार के माध्यम से कार्यप्रणाली को आधुनिक और सुरक्षित बनाया जा सकता है।
