जबलपुर। समाज में अक्सर सास-बहू के बीच तनाव और विवाद की खबरें ही चर्चा का विषय बनती हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के जबलपुर से एक ऐसा मर्मस्पर्शी मामला सामने आया है जो रिश्तों की गरिमा और संवेदनाओं की नई परिभाषा लिख रहा है। मुंबई की रहने वाली एक महिला अपने लापता बुजुर्ग सास-ससुर की तलाश में सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर संस्कारधानी पहुंची है। वह शहर के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर निरंकारी सत्संग भवनों के बाहर अपने हाथों में पोस्टर थामे खड़ी नजर आ रही है, ताकि अपने परिवार के उन स्तंभों को वापस पा सके जो पिछले आठ महीनों से अज्ञात कारणों से दूर हो गए हैं। महिला का कहना है कि उसके सास-ससुर का उसके जीवन में वही स्थान है जो एक संतान के लिए उसके माता-पिता का होता है। मुंबई से जबलपुर तक का यह सफर उसने इसी उम्मीद में तय किया है कि शायद यहां के किसी कोने में या सत्संग से जुड़े किसी अनुयायी के माध्यम से उसे कोई सुराग मिल जाए। स्थानीय लोग जब उस महिला को चिलचिलाती धूप में पोस्टर लिए खड़ा देखते हैं, तो उसकी प्रतिबद्धता देखकर दंग रह जाते हैं।
आठ महीनों का लंबा इंतजार और पुलिस की कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, बुजुर्ग दंपति करीब आठ महीने पहले मुंबई से अचानक लापता हो गए थे। परिवार ने शुरुआत में अपने स्तर पर हर संभव प्रयास किया और स्थानीय पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई। महिला ने बताया कि "हमने पुलिस प्रशासन से लेकर रिश्तेदारों तक हर जगह गुहार लगाई, लेकिन समय बीतने के साथ हमारी उम्मीदें धुंधली पड़ने लगी थीं।" लंबी अवधि बीत जाने के बावजूद जब पुलिस की जांच से कोई ठोस परिणाम नहीं निकला, तो महिला ने स्वयं मोर्चा संभालने का फैसला किया। वह उन तमाम शहरों का रुख कर रही है, जहां उसके सास-ससुर के जाने की थोड़ी भी संभावना हो सकती है।
सत्संग भवन के सामने नम आंखों से गुहार
जबलपुर में अपनी तलाश के दौरान महिला विशेष रूप से निरंकारी सत्संग भवन को केंद्र बना रही है। वह हर आने-जाने वाले श्रद्धालु से हाथ जोड़कर अपील कर रही है और अपने सास-ससुर की तस्वीर वाला पोस्टर दिखाकर पूछती है कि क्या किसी ने उन्हें देखा है। वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि महिला की आंखों में अपने बुजुर्गों को खोने का दर्द साफ झलकता है। वह कहती है कि मेरे सास-ससुर बहुत सीधे और सरल स्वभाव के व्यक्ति हैं, उनके बिना घर सूना हो गया है और जब तक वे सुरक्षित घर नहीं लौट आते, मुझे चैन नहीं मिलेगा।
