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8 की बोरी, 25 का भाव! जबलपुर में किसानों को निचोड़ने का नया व्यापारिक सिंडिकेट सक्रिय

 


जबलपुर। जिले के मटर उत्पादक किसानों के साथ इन दिनों सरेआम एक ऐसा 'खेल' खेला जा रहा है, जिसने अन्नदाता की नींद उड़ा दी है। मटर की बंपर पैदावार के बीच बाजार में अचानक बारदाने (प्लास्टिक बोरियों) का संकट खड़ा कर दिया गया है। इस कृत्रिम संकट की आड़ में जो खेल पर्दे के पीछे चल रहा है, उसका खुलासा नवयुवक किसान संघर्ष मोर्चा ने किया है। मोर्चा के पदाधिकारियों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि शहर के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों पर किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनकी मेहनत की कमाई पर डाका डाला जा रहा है।

दमोह नाका की दुकानों में 'लूट' का नया फॉर्मूला


नवयुवक किसान संघर्ष मोर्चा के अन्नू पटेल और अभय उपाध्याय ने बताया कि मटर भरने के लिए उपयोग होने वाली प्लास्टिक की बोरियों के दामों में रातों-रात बेतहाशा वृद्धि कर दी गई है। उन्होंने प्रेस नोट के जरिए जानकारी दी कि "जो प्लास्टिक की बोरियां कुछ समय पहले तक महज 8 रुपए में आसानी से मिल रही थीं, उन्हें अब 20 से 25 रुपए के मनमाने रेट पर बेचा जा रहा है।" यह लूट विशेष रूप से दमोह नाका पेट्रोल पंप के सामने स्थित दुकानों में बेखौफ होकर चल रही है। अलग-अलग दुकानों पर बोरियों के रेट भी अलग-अलग तय किए गए हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि यहां कोई निर्धारित नियम काम नहीं कर रहा, बल्कि जिसकी जितनी मर्जी, उतनी वसूली की जा रही है।

न बिल, न ऑनलाइन पेमेंट: काली कमाई का बड़ा नेटवर्क

​इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि यह पूरा कारोबार कागजों से दूर रहकर किया जा रहा है। संघर्ष मोर्चा के राहुल यादव और गुड्डू पटेल ने खुलासा किया कि "दुकानदार बोरियों के पैसे केवल नकद (कैश) में ही स्वीकार कर रहे हैं।" यदि कोई किसान चेक या ऑनलाइन माध्यम से भुगतान करना चाहता है, तो उसे साफ मना कर दिया जाता है। हद तो तब हो जाती है जब इतनी बड़ी रकम लेने के बावजूद किसानों को खरीदी का कोई बिल तक नहीं दिया जा रहा। अनुमान के मुताबिक, क्षेत्र में प्रतिदिन करीब 5000 बोरियां बेची जा रही हैं। यदि एक बोरी पर 15 रुपए की भी अवैध वसूली हो रही है, तो रोजाना लाखों रुपए का काला धन इस सिंडिकेट की जेब में जा रहा है।

प्रशासन की चुप्पी और किसानों का बढ़ता आक्रोश

​किसानों का आरोप है कि यह महज व्यापारियों की मनमानी नहीं है, बल्कि इसके तार ऊपर तक जुड़े हुए हैं। परसोत्तम उपाध्याय और अटल उपाध्याय ने आशंका जताई है कि ग्राम सेवक और कृषि विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी लूट संभव नहीं है। व्यापारियों द्वारा खाद, बीज और अब बारदाने के नाम पर किसानों को आर्थिक रूप से खोखला किया जा रहा है। नवयुवक किसान संघर्ष मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने जल्द ही इन दुकानों पर छापेमारी कर उचित दरें तय नहीं कीं, तो किसान सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। उनकी मांग है कि अन्नदाता को उचित और सस्ते दाम पर गुणवत्तापूर्ण बोरियां उपलब्ध कराई जाएं ताकि वे अपनी फसल को सुरक्षित बाजार तक पहुंचा सकें।

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