जबलपुर। मध्य प्रदेश शासन के संस्थागत वित्त संचालनालय ने बैंक ऑफ बड़ौदा को लेकर एक बड़ा कड़ा निर्णय लिया है। भोपाल स्थित विंध्याचल भवन से जारी आदेश के अनुसार अब यह बैंक अगले 5 वर्ष तक प्रदेश में किसी भी प्रकार का शासकीय व्यवसाय नहीं कर सकेगा। आयुक्त संस्थागत वित्त द्वारा 27-03-2026 को जारी इस आदेश ने बैंकिंग और सरकारी महकमों में हलचल पैदा कर दी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बैंक ऑफ बड़ौदा को उन बैंकों की सूची से बाहर कर दिया गया है जिन्हें वित्त विभाग द्वारा शासकीय कोष विनियोजन के लिए अधिकृत किया गया था। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री किसान योजना से जुड़ी एक बड़ी धनराशि के अंतरण में बैंक की विफलता के कारण की गई है।
करोड़ों की राशि का भुगतान रोकने पर हुआ सख्त एक्शन
इस पूरे विवाद की जड़ में मुख्यमंत्री किसान योजना के खाता क्रमांक 59160100001021 में जमा 17519806724 रुपये की विशाल राशि है। इस 1751 करोड़ 98 लाख 6 हजार 724 रुपये की राशि को साइबर ट्रेजरी के माध्यम से कृषि विभाग के रसीप्ट हेड 0401-00-800-0099 में जमा किया जाना था। भू-संसाधन प्रबंधन आयुक्त कार्यालय द्वारा इस संबंध में 26-03-2026 और 27-03-2026 को लगातार निर्देश दिए गए थे। शासन का आरोप है कि बैंक इन आदेशों के पालन में पूरी तरह विफल रहा जिससे सरकार को अपूरणीय क्षति हुई है। इसी कार्यव्यवहार को आधार बनाकर बैंक को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
ठेकेदारों की बैंक गारंटी और अमानत राशि पर संशय
संचालनालय के इस आदेश के बाद अब जबलपुर सहित पूरे प्रदेश के स्थानीय कोषालयों में असमंजस की स्थिति बन गई है। सबसे बड़ी समस्या उन ठेकेदारों और फर्मों के सामने खड़ी हो गई है जिनकी करोड़ों रुपये की बैंक गारंटी और जमानत राशियां बैंक ऑफ बड़ौदा में जमा हैं। स्थानीय कोषालय अधिकारी फिलहाल यह स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं कि इस प्रतिबंध के बाद पुरानी बैंक गारंटियों का क्या होगा और क्या उन्हें किसी दूसरे बैंक में स्थानांतरित करना होगा। विभागीय अफसरों का कहना है कि इस तकनीकी समस्या के समाधान के लिए शासन जल्द ही विस्तृत गाइडलाइन जारी करेगा। वर्तमान में आदेश की प्रति केंद्रीय वित्त मंत्रालय, मध्य प्रदेश के अपर मुख्य सचिव और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के संयोजक को भेजकर सूचित कर दिया गया है।
