नई दिल्ली. केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है. केंद्र सरकार ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि 8वां केंद्रीय वेतन आयोग सक्रिय रूप से अगले स्तर के वेतन और पेंशन संशोधन पर काम कर रहा है.
23 मार्च 2026 को लोकसभा में जानकारी देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने दोहराया कि नवंबर 2025 में गठित इस आयोग को 18 महीने के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है. 7वें वेतन आयोग का दस साल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद, अब कर्मचारी 1 जनवरी 2026 को नई वेतन संरचना के प्रभावी होने की तिथि के रूप में देख रहे हैं.
वेतन आयोग का अब तक का सफर
8वें वेतन आयोग के संभावित प्रभाव को समझने के लिए पिछले दो दशकों के बदलावों को देखना जरूरी है. 2006 में लागू 6वें वेतन आयोग ने न्यूनतम प्रवेश स्तर का वेतन 6,600 रुपये तय किया था. इसके बाद 2016 में आए 7वें वेतन आयोग ने 'पे बैंड' और ग्रेड पे प्रणाली को खत्म कर पे मैट्रिक्स की शुरुआत की. 2.57 के फिटमेंट फैक्टर के साथ न्यूनतम मासिक वेतन 18,000 रुपये और कैबिनेट सचिव का अधिकतम वेतन 2,50,000 रुपये निर्धारित किया गया था.
8वें वेतन आयोग में कितनी होगी बढ़ोतरी?
वर्तमान में सबसे बड़ी चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर है, जो मूल वेतन को संशोधित करने का गुणक होता है. जहां 7वें वेतन आयोग में यह 2.57 था, वहीं कर्मचारी संगठन अब इसे 3.0 से 3.25 के बीच रखने की मांग कर रहे हैं.
न्यूनतम वेतन: यदि 0 का फिटमेंट फैक्टर मंजूर होता है, तो न्यूनतम मूल वेतन 18,000 रुपये से बढ़कर लगभग 54,000 रुपये हो सकता है.
महंगाई भत्ता (डीए): वर्तमान में डीए 58 प्रतिशत के करीब है, जिसके कार्यान्वयन के समय तक 70 प्रतिशत तक पहुँचने का अनुमान है.
फैमिली यूनिट्स: यूनियन अब वेतन की गणना 3 के बजाय 5 फैमिली यूनिट्स के आधार पर करने की मांग कर रही हैं, जिससे बेसलाइन में 66 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है.
कार्यान्वयन और समय सीमा
8वें वेतन आयोग का कार्यकाल सैद्धांतिक रूप से 1 जनवरी 2026 से शुरू हो चुका है, लेकिन वास्तविक कार्यान्वयन में समय लग सकता है. आयोग के पास अपनी सिफारिशें अंतिम रूप देने के लिए मध्य-2027 तक का समय है. रिपोर्ट सौंपने के बाद कैबिनेट को समीक्षा के लिए 3 से 6 महीने का समय चाहिए होता है. हालांकि, पिछले अनुभवों के अनुसार, वेतन वृद्धि पूर्वव्यापी रूप से लागू की जाती है, जिससे कर्मचारियों को 1 जनवरी 2026 से एरियर मिलना सुनिश्चित होता है.
राज्य कर्मचारियों पर प्रभाव
8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का असर केवल 4.8 मिलियन केंद्रीय कर्मचारियों और 6.7 मिलियन पेंशनभोगियों तक सीमित नहीं रहेगा. अधिकांश राज्य सरकारें भी वेतन समानता बनाए रखने के लिए केंद्र की सिफारिशों के अनुरूप अपनी वेतन संरचना में बदलाव करती हैं. इस प्रकार, 8वें वेतन आयोग की घोषणा भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के विशाल कार्यबल के लिए वित्तीय बेंचमार्क साबित होगी.
