जैसे ही यह जानकारी सार्वजनिक हुई राजनीति भी गरमा गई। कांग्रेस ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। नेताओं का कहना है कि जब आम जनता से सख्ती से टैक्स वसूला जाता है तो फिर महल और उससे जुड़ी संपत्तियों पर बकाया होने के बावजूद अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। कांग्रेस इसे भेदभावपूर्ण रवैया बताते हुए प्रशासन को घेरने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर इस पूरे विवाद पर नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि सूची नियमानुसार जारी की गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सिंधिया परिवार से जुड़ी संपत्तियों पर बकाया टैक्स के मामले की बारीकी से जांच की जाएगी और दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा। फिलहाल प्रशासन इस मामले में फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके। ग्वालियर नगर निगम द्वारा जारी की गई इस विस्तृत सूची में केवल निजी संपत्तियां ही नहीं, बल्कि कई बड़े शासकीय संस्थान भी शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार इन सरकारी संस्थानों पर नगर निगम का लगभग 300 करोड़ रुपए का भारी-भरकम संपत्ति कर बकाया है। बकायादारों की इस फेहरिस्त में सबसे चर्चित नाम स्वर्गीय माधवराव सिंधिया का है। इनके नाम पर नगर निगम ने 33 लाख 32 हजार 719 रुपए की राशि बकाया दर्शाई है। इतने बड़े नाम का बकाया सूची में आना चर्चा का विषय बन गया है। निगम की फाइलों में दर्ज यह राशि लंबे समय से लंबित बताई जा रही है।