जबलपुर। मध्य प्रदेश के विद्युत क्षेत्र में एक बड़ा तकनीकी और प्रशासनिक बदलाव प्रभावी हो गया है। इसके तहत अब प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के घरों और संस्थानों में लगे स्मार्ट मीटर खुद ही बिजली का लोड बढ़ाने का काम करेंगे। इस नई व्यवस्था को बिजली विभाग द्वारा ऑटोमेटिक लोड एनहांसमेंट सिस्टम के रूप में देखा जा रहा है। अब तक उपभोक्ताओं को अपना स्वीकृत लोड बढ़ाने के लिए बिजली कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते थे या ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता था। लेकिन अब तकनीक की मदद से विभाग ने इसे पूरी तरह से स्वचालित कर दिया है। यह कदम मुख्य रूप से उन उपभोक्ताओं पर केंद्रित है जिनका वास्तविक बिजली उपयोग उनके द्वारा लिए गए स्वीकृत लोड से अधिक पाया जाता है।
Electricity Act 2025 में लागू की गई नई व्यवस्था
केंद्र सरकार द्वारा लाए गए Electricity Act 2025 के प्रावधानों को मध्य प्रदेश में भी तेजी से लागू किया जा रहा है। इस नए कानून के तहत बिजली वितरण कंपनियों को यह अधिकार दिया गया है कि वे उपभोक्ताओं के बिजली उपयोग की निगरानी डिजिटल माध्यम से करें। नए नियमों के अनुसार यदि कोई उपभोक्ता अपने स्वीकृत लोड से अधिक बिजली का उपयोग करता है, तो स्मार्ट मीटर उस अतिरिक्त मांग को रिकॉर्ड करेगा। यह रिकॉर्डिंग लगातार कुछ महीनों तक की जाएगी और यदि औसत खपत स्वीकृत सीमा को पार करती है, तो सिस्टम स्वतः ही लोड को अपग्रेड कर देगा। यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रखी गई है ताकि मानवीय हस्तक्षेप की गुंजाइश न रहे। इस नियम का मुख्य उद्देश्य बिजली ग्रिड पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को नियंत्रित करना और वितरण व्यवस्था को सुचारू बनाना है।
लोड बढ़ने से फिक्स चार्ज में भी बढ़ोत्तरी
स्मार्ट मीटर द्वारा लोड बढ़ाए जाने का सीधा असर उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिल पर पड़ेगा। बिजली बिल के दो मुख्य भाग होते हैं, जिसमें पहला ऊर्जा शुल्क और दूसरा फिक्स चार्ज होता है। फिक्स चार्ज सीधे तौर पर स्वीकृत लोड से जुड़ा होता है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी उपभोक्ता का स्वीकृत लोड 1 किलोवाट है और स्मार्ट मीटर उसे बढ़ाकर 2 किलोवाट कर देता है, तो उस उपभोक्ता को हर महीने लगने वाला फिक्स चार्ज भी 2 किलोवाट के हिसाब से देना होगा। Electricity Act 2025 के तहत फिक्स चार्ज की दरों में भी समय-समय पर बदलाव का प्रावधान है। ऐसे में उपभोक्ताओं को अब अपनी बिजली की खपत के प्रति अधिक सतर्क रहना होगा क्योंकि लोड बढ़ने से उनके बिल का एक बड़ा हिस्सा स्थायी रूप से बढ़ जाएगा।
स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली और सर्विलांस प्रोसेस
मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों विशेषकर जबलपुर, इंदौर, भोपाल और ग्वालियर में स्मार्ट मीटर लगाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। ये स्मार्ट मीटर प्रत्येक 15 से 30 मिनट के अंतराल पर बिजली की खपत का डेटा बिजली कंपनी के सर्वर पर भेजते हैं। विभाग के सॉफ्टवेयर इस डेटा का विश्लेषण करते हैं। यदि किसी घर में एयर कंडीशनर, हीजर या अन्य भारी उपकरणों के कारण बिजली की मांग स्वीकृत सीमा से ऊपर जाती है, तो उसे मैक्सिमम डिमांड के रूप में दर्ज किया जाता है। यदि यह अधिकतम मांग निर्धारित नियमों के तहत लगातार बनी रहती है, तो उपभोक्ता को पूर्व सूचना देते हुए लोड में वृद्धि कर दी जाती है। इस प्रणाली से बिजली चोरी और लोड छिपाने की प्रवृत्ति पर लगाम लगने की उम्मीद है।
जबलपुर सहित पूरे प्रदेश में वितरण कंपनियों की सक्रियता
मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड जबलपुर के अधिकार क्षेत्र में इस व्यवस्था को लेकर विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर पर अचानक आने वाले लोड को कम किया जा सकेगा। अक्सर देखा जाता है कि लोग कम लोड लेकर अधिक बिजली उपकरणों का संचालन करते हैं जिससे ट्रांसफार्मर जलने की शिकायतें आती हैं। जबलपुर के साथ-साथ प्रदेश की अन्य वितरण कंपनियां भी इस ऑटोमेटिक सिस्टम को अपने बिलिंग सॉफ्टवेयर से जोड़ चुकी हैं। विभागीय अमला अब ग्राउंड स्तर पर जाकर उन उपभोक्ताओं की सूची तैयार कर रहा है जिनके मीटर में स्वीकृत लोड से अधिक खपत दर्ज हो रही है।
उपभोक्ताओं के लिए विभाग से की अपील
बिजली विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपने घर के लोड के अनुसार ही बिजली का कनेक्शन रखें। यदि किसी उपभोक्ता को लगता है कि उनके घर में बिजली उपकरणों की संख्या बढ़ गई है, तो उन्हें खुद ही लोड बढ़वा लेना चाहिए। स्मार्ट मीटर के माध्यम से होने वाली लोड वृद्धि से बचने के लिए विद्युत उपकरणों का संतुलित उपयोग आवश्यक है। आने वाले समय में प्रदेश के शत-प्रतिशत उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर के दायरे में लाने की योजना है। इससे न केवल रीडिंग की समस्या खत्म होगी बल्कि बिलिंग में होने वाली गलतियों को भी न्यूनतम स्तर पर लाया जा सकेगा। Electricity Act 2025 के सफल क्रियान्वयन के लिए विभाग अब तकनीकी प्रशिक्षण और जन जागरूकता पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है।
