मांग की है कि सरकार इस विरोधाभास को दूर करे और जनता को स्पष्ट करे कि यदि मीटर मुफ्त हैं, तो राजस्व रिपोर्ट में इसके लिए करोड़ों रुपये की वसूली का प्रस्ताव क्यों रखा गया है
जबलपुर। मध्य प्रदेश विधानसभा में ऊर्जा मंत्री द्वारा स्मार्ट मीटरों को लेकर दिए गए जवाब पर नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मंच ने ऊर्जा मंत्री के उस बयान को पूरी तरह विरोधाभासी और गुमराह करने वाला करार दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रदेश के परिसरों में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों का खर्च उपभोक्ताओं से नहीं वसूला जाएगा। मंच के अध्यक्ष डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने आधिकारिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि बिजली कंपनियों ने उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ डालने की पूरी तैयारी कर ली है।
वार्षिक राजस्व रिपोर्ट में 820 करोड़ के खर्च का प्रावधान
डॉ. नाजपांडे ने बताया कि बिजली कंपनियों ने नियामक आयोग के समक्ष प्रस्तुत अपनी वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) रिपोर्ट में आगामी समय के लिए 10.19 प्रतिशत बिजली दरें बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। इस रिपोर्ट में स्मार्ट मीटरों के खर्च के मद में कुल 820.62 करोड़ रुपये उपभोक्ताओं से वसूलने की मांग की गई है। दस्तावेजों का विश्लेषण करते हुए उन्होंने कहा कि "एआरआर के पृष्ठ संख्या 129 पर स्मार्ट मीटरों के ऑपरेशनल खर्च के लिए 307 करोड़ रुपये और पृष्ठ संख्या 133 पर लीज चार्ज खर्च हेतु 513.62 करोड़ रुपये का स्पष्ट प्रावधान किया गया है।" इन दोनों राशियों को जोड़कर बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं से वसूली की अनुमति मांग रही हैं।
बिजली दरों में बढ़ोतरी का आधार बनेगा स्मार्ट मीटर का खर्च
मंच का तर्क है कि जब इन खर्चों को एआरआर में शामिल कर लिया गया है, तो भविष्य में होने वाली बिजली दरों की बढ़ोतरी का यह एक प्रमुख आधार बनेगा। स्मार्ट मीटर किसी भी स्थिति में नि:शुल्क नहीं हैं, क्योंकि इनका वित्तीय भार अंततः जनता पर ही आना है। मंच के अन्य सदस्यों रजत भार्गव, एडवोकेट वेदप्रकाश अधौलिया, टी.के. रायघटक और संतोष श्रीवास्तव ने भी ऊर्जा मंत्री के विधानसभा में दिए गए जवाब को भ्रामक बताया है। उन्होंने मांग की है कि सरकार इस विरोधाभास को दूर करे और जनता को स्पष्ट करे कि यदि मीटर मुफ्त हैं, तो राजस्व रिपोर्ट में इसके लिए करोड़ों रुपये की वसूली का प्रस्ताव क्यों रखा गया है।
